स्वीडेन | जन्म के समय बच्चे का कम वजन होना, बड़े होकर कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। कम जन्म वजन (Low Birthweight) वाले बच्चे में कम उम्र में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह निष्कर्ष European Congress (यूरोपियन कॉन्ग्रेस) द्वारा मोटापा पर किये गए एक शोध के दौरान निकलकर आया है। विशेषज्ञों ने शुरुआती जीवन के स्वास्थ्य और भविष्य के जोखिमों के बीच संबंध को जोड़ते हुए यह शोध किया है।
8 लाख लोगों पर हुई रिसर्च
यह अध्ययन University of Gothenburg के वैज्ञानिकों डॉ लीना लिल्जा और डॉ मारिया बाइग्डेल ने किया है। इसमें 1973 से 1982 के बीच जन्मे करीब 8 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने मेडिकल बर्थ रजिस्टर और नेशनल हेल्थ डेटाबेस की मदद से साल 2022 तक स्ट्रोक के मामलों का अध्ययन किया।
क्या मिले अहम नतीजे?
- कुल 2,252 लोगों को पहली बार स्ट्रोक हुआ
- 1,624 मामले इस्केमिक स्ट्रोक के थे
- 588 मामले ब्रेन हेमरेज (इंट्रासेरेब्रल हेमरेज) के थे
- 3.5 किलोग्राम से कम जन्म वजन वाले लोगों में 21% से ज्यादा को स्ट्रोक का खतरा पाया गया
- महिलाओं में 18 फीसदी और 23 फीसदी पुरुषों में स्ट्रोक होना का ज्यादा खतरा पाया गया
बीएमआई से नहीं पड़ता फर्क:
अध्ययन की सबसे अहम बात यह रही कि यह बढ़ा हुआ खतरा न तो बीएमआई (Body Mass Index) से जुड़ा था और न ही गर्भकाल (Gestational Age) से। यानी, कम जन्म वजन अपने आप में ही एक बड़ा जोखिम कारक बन सकता है।
युवाओं में बढ़ रहा स्ट्रोक का खतरा
पिछले कुछ दशकों में स्ट्रोक के मामलों में कमी तो आई है, लेकिन युवाओं में यह गिरावट उतनी प्रभावी नहीं रही है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में युवाओं में स्ट्रोक के मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं। स्टडी में यह बात सामने आई है कि स्वास्थ्य की शुरुआत जन्म से ही हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति का जन्म के समय वजन कम हो, तो उसे भविष्य में स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए डॉक्टरों का मानना है कि यदि बच्चा जन्म के समय यदि कम वजन का हो तो उसकी नियमित जांच होनी चाहिए। साथ ही उसके खानपान और मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य का भी ख्याल मां-बाप को रखना चाहिए।

