सीतामढ़ी/पटना। सीतामढ़ी के मुरादपुर (बाजपट्टी) में करीब 600 करोड़ की लागत से बन रहे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का नाम बदलकर “मां सीता चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, सीतामढ़ी” करने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव मृणायक दास की ओर से इसको लेकर मीडिया को एक प्रेस रिलीज भी जारी किया गया है। यह फैसला जिले की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है और रामायण काल से इसका विशेष महत्व रहा है।
सरकार का मानना है कि मेडिकल कॉलेज के नामकरण से जिले की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही, राज्य के छात्रों को बेहतर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी यह संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही बिहारी अस्मिता को भी बचाएगा तथा बाहर के राज्यों में मेडिकल के छात्रों के पलायन को रोकेगा।

स्वीकृति के बाद सात साल से लटका है प्रोजेक्ट
सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। 2019 में सर्वप्रथम इसे स्वीकृति दी गई थी। सालभर इसके लिए जमीन खोजने में लग गए। 2020 में जब कृषि विभाग की जमीन को इसके लिए दिया गया तो कोरोना के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। बाद में निर्माण कार्य की धीमी गति की वजह से पहले 2024 में इसका काम पूरा नहीं हो पाया। फिर 2025 में इसे पूरा करना था पर वह डेडलाइन भी खत्म हो गया। निर्माण की स्थिति देखते हुए इस साल भी इसके पूरा होने की संभावना नहीं है।
500 बेड का मल्टी स्पेशियालिटी अस्पताल
यह मेडिकल कॉलेज अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां 500 बेड क्षमता वाले अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। अस्पताल परिसर में अलग-अलग ओपीडी ब्लॉक, वार्ड ब्लॉक, ऑक्सीजन प्लांट, एमजीपीएस रूम, एकेडमिक एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ओपीडी और इमरजेंसी के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार तैयार किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत अकादमिक जोन में मेडिकल कॉलेज के साथ नर्सिंग कॉलेज, अकादमिक ब्लॉक और छात्रावास का निर्माण भी चल रहा है। हॉस्टल ब्लॉक में लड़कों के लिए 264 सीट और लड़कियों के लिए 228 सीट क्षमता वाले छात्रावास बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा इंटर्नशिप छात्रों के लिए 54 कमरों का निर्माण किया जा रहा है।
रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के लिए अलग आवासीय परिसर भी तैयार करने की योजना है। डीन, सुपरिटेंडेंट, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और नन-टीचिंग स्टाफ के लिए भी आवास बनाए जा रहे हैं।
मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का भी रखा जाएगा ध्यान
मेडिकल कॉलेज परिसर में आधुनिक इंजीनियरिंग सेवाओं का भी विकास किया जाएगा। इसके तहत एसटीपी-ईटीपी प्लांट, सेंट्रल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, पंप रूम, यूजी टैंक, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और इलेक्ट्रिकल सबग्रिड जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। कॉलेज और अस्पताल परिसर को वाई-फाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से भी कनेक्ट किया जाएगा। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने वाली करीब 10 किलोमीटर के दायरे की सड़कों का चौड़ीकरण भी कराया जाएगा, ताकि मरीजों और एंबुलेंस को आने-जाने में परेशानी न हो।
मुजफ्फरपुर पर घटेगा बोझ
बिहार सरकार का कहना है कि इस मेडिकल कॉलेज के शुरू होने से राज्य के छात्रों का दूसरे राज्यों की ओर पलायन कम होगा। साथ ही उत्तर बिहार के लोगों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। हालांकि, अभी कोई भी इमरजेंसी होने पर सीतामढ़ी से लेकर रक्सौल तक के लोगों को मुजफ्फरपुर आना पड़ता है, खासकर दुर्घटना के मामलों में। सीतामढ़ी में मेडिकल कॉलेज के शुरू हो जाने से इमरजेंसी के मरीज को जल्द से जल्द वहां पहुंचाया जा सकेगा और उनके जान बचाने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

