टाइप 2 डायबिटीज (diabetes type 2) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है। दरअसल इस स्थति में अग्नयाशय (pancreas) पहले की अपेक्षा कम इंसुलिन बनाता है, इससे शरीर इंसुलिन रेसिस्टेंट (resistant to insulin) हो जाता है यह कहें कि इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है। उसका सही से उपयोग नहीं कर पाता है। इस वजह से खून (blood) में शूगर (Sugar) का स्तर बढ़ जाता है।
क्या है इंसूलिन?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो रक्त शर्करा (blood sugar) को नियंत्रित करता है। ब्लड शूगर के बढ़ने को हाइपरग्लाइसीमिया (hyperglycemia) कहा जाता है। वहीं जब खून में शूगर की कमी होती है तो उसे हाइपोग्लाइसीमिया (hypoglycemia) कहा जाता है। रक्त में चीनी (sugar) की मात्रा के बढ़ने से मधुमेह होता है। समय रहते इस पर ध्यान नहीं देने से यह शरीर की कई प्रणालियों, विशेष रूप से तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
ब्लड शूगर जब इतना बढ़ने लगे कि उसे दवा से कंट्रोल करने की जरूरत पड़े तो उसे मधुमेह (diabetes) कहते हैं।90-95% डायबिटीज टाइप-2 प्रकार के ही होते हैं। ये आमतौर पर 45 या उससे अधिक उम्र के लोगों में पाया जाता है। 45 वर्ष से कम की उम्र में इस डायबिटीज के होने की वजह मोटापा या जेनेटिक(जिन) डिसऑर्डर (obesity or genetic) हो सकता है।
50 फीसदी भारतीय मरीज डायबिटीज से अनजान
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research) के साल 2023 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में 18 वर्ष से ऊपर के 7.7 करोड़ लोग टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित हैं। वहीं, 2.5 करोड़ लोग प्रीडायबेटिक स्टेज यानी कि हाई ब्लड शूगर के बॉर्डर लाइन पर हैं और अगर वे अपनी जीवनशैली और खानपान का ख्याल नहीं रखते हैं तो मधुमेह या डायबिटीज से ग्रसित होने वाले हैं। चिंता की बात यह भी है कि 50 फीसदी भारतीय डायबिटीज के मरीजों को उनके डायबेटिक स्टेज (ब्लड शूगर की स्थिति) का पता ही नहीं है। वहीं, अमेरिका में लगभग 3.8 करोड़ लोग मधुमेह या डायबिटीज से प्रभावित हैं। इसमें भी 5 में से 1 व्यक्ति को इसका पता नहीं है। वैश्विक स्तर पर, लगभग 53.7 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जो 2045 तक 78.3 करोड़ तक बढ़ने की आशंका है।
WHO के अनुसार डायबिटीज के कारण अंधापन (blindness), किडनी का खराब होना (kidney failure), दिल का दौरा(heart attacks), स्ट्रोक(stroke ) और निचले अंग का विच्छेदन (lower limb amputation) हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर साल 2021 में, मधुमेह और मधुमेह के कारण होने वाली किडनी की बीमारी से 20 लाख से अधिक मौतें हुईं। वहीं 11 फीसदी हृदय रोगियों की मौत भी डायबिटीज और High Blood sugar के कारण हुईं।
टाइप 2 डायबिटीज के कारण
टाइप 2 डायबिटीज़ का मुख्य कारण शरीर का इंसुलिन प्रतिरोध करना है, जिसके कारण पैनक्रियाज जरूरत के हिसाब से इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है। मोटापा, मधुमेह का पारिवारिक इतिहास (family history of Diabetes), शारीरिक निष्क्रियता (Physical inactivity), हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप (High Blood pressure), गर्भावस्था के दौरान खराब पोषण और कुछ हद तक बढ़ती उम्र भी डायबिटीज के मुख्य कारक हैं।

टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण
- अक्सर पेशाब आना : डायबिटीज के मरीजों को पेशाब करने की इच्छा बार-बार होती है, पर पूरी तरह पेशाब हो नहीं पाता है।
- अत्यधिक प्यास लगना : बार-बार पेशाब जाने के बाद उन्हें प्यास भी उसी गति से लगती है।
- ज्यादा भूख लगना: डायबिटीज के मरीजों को भूख भी ज्यादा लगती है। चिकित्सकों के अनुसार पैनक्रियाज में इंसुलिन कम बनने के कारण उनमें ऊर्जा की कमी देखी जाती है। इसलिए उन्हें भूख भी ज्यादा लगती है। इसलिए डायबिटीज के मरीज को डॉक्टर सीमित मात्रा में थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करने की सलाह देते हैं।
- अत्यधिक थकान : इंसुलिन कम बनने की वजह से थकान भी अधिक महसूस होता है।
- धुंधली दृष्टि: हाई ब्लड शूगर की वजह से आंखों की रेटिना (retina) की रक्त वहिकाओं या ब्लड वैसील्स (blood vessels) को नुकसान पहुंचता है। इस वजह से आंखों की दृष्टि धुंधली होने लगती है और कई बार तो समय पर ध्यान नहीं देने से अंधापन भी हो सकता है।
- घाव का धीमी गति से ठीक होना : ब्लड शूगर की अधिकता की वजह से शरीर में यदि कहीं चोट पहुंचे और जख्म या घाव हो जाए तो उसे भी ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।
- हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नता : डायबिटीज के मरीजों में अक्सर हाथ और पैरों में झुनझुनी या सुन्नता (tingling or numbness) के लक्षण देखे जाते हैं।
टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों को ये समस्याएं भी हो सकती हैं:
- बार-बार या बार-बार होने वाले संक्रमण
- घावों का ठीक से न भर पाना
- मसूड़ों की समस्या, मुंह से दुर्गंध आना
- खुजली और दिनाय का होना और जल्दी ठीक न होना
- माताओं को स्तनपान कराने में समस्या हो सकती है
डायबिटीज पता करने के लिए जांच :
35 उम्र के बाद यदि डायबिटीज के लक्षण हों, तो जरूर इसकी जांच करानी चाहिए। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की शाखा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases or NIDDK) के अनुसार ब्लड शूगर की जांच कई तरीके से की जाती है।
- खाली पेट में fasting plasma glucose (FPG) टेस्ट
- ए1सी टेस्ट ब्लड शूगर के तीन महीने का औसत
- रैडम प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट (Random plasma glucose test) यह टेस्ट कभी भी कराया जा सकता है
- ग्लूकोज चैलेंज टेस्ट (Glucose challenge test)
- ओरल ग्लूकोज टोलरेंस टेस्ट (Oral glucose tolerance test)
जीवनशैली में सुधार जरूरी:
- खानपान: स्वच्छ और संतुलित आहार लें। इनमें सलाद और स्प्राउट्स की मात्रा अधिक हो। फलों का जूस लेने के बजाय साबूत फल को चबाकर खाएं। मोटा अनाज जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, मड़ुआ आदि की रोटी का सेवन करें। साग, तीसी, मखाना आदि का सेवन करें।
- शारीरिक गतिविधि : शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं। बागवानी, खेलकूद, नियमित व्यायाम का अभ्यास करें। मेडिटेशन व प्राणायाम या फिर श्वसन व्यायाम का अभ्यास करें। तनाव से जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
- बीएमआई को संतुलित रखें: बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स को संतुलित रखें। यानी अपनी लंबाई के हिसाब से वजन को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
- धूम्रपान से बचें : धूम्रपान, तंबाकू, गुटखा और अन्य व्यसनों से बचें। इसके सेवन से आपकी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। साथ ही यह हार्मोन को भी असंतुलित करता है। यह अन्य रोगों का भी कारक है, जिसमें फेफड़ा, हृदय और मस्तिष्क से जुड़े रोग शामिल हैं।
दवा बीच में छोड़ना ठीक नहीं:
डायबिटीज के मरीजों का यदि ब्लड शूगर नियंत्रित न हो, तो मौखिक दवा देकर इसे कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, जो लोग दवा बीच में छोड़ देते हैं, उनको कई बार हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक तक होने का खतरा होता है। इंसुलिन की सही मात्रा शरीर तक पहुंचने के लिए इंजेक्शन की भी जरूरत पड़ सकती है।


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