दुनिया के सबसे खतरनाक और संक्रामक रोगों में एक है ट्यूबरकुलोसिस या टीबी (Tuberculosis)। इसे भारत में क्षय रोग के नाम से भी जाना जाता है। यह Mycobacterium Tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, लेकिन सबसे अधिक असर फेफड़ों, लिम्फ नोड, जोड़–हड्डी, और मेनिन्जेस (दिमाग की झिल्ली) पर होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हर साल टीबी से करीब एक करोड़ लोग संक्रमित होते हैं। साथ 15 लाख लोग इस संक्रामक रोग से मारे भी जाते हैं। जो कोरोना (COVID-19) के बाद किसी संक्रामक रोग से मौत की स्थिति में सर्वाधिक है। भारत में भी टीबी की स्थिति ठीक नहीं है। टीबी संक्रमित रोगी की 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है।
यूनाइटेड नेशन के लक्ष्य के अनुसार 2030 तक विश्व को टीबी मुक्त बनाने की ओर अथक प्रयास हो रहे हैं। इसके तहत हाल ही में टीबी का टीका बनाने का दावा किया गया है। अमेरिका की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के वैज्ञानिकों ने टीबी (Tuberculosis) नया और प्रभावी टीका (New TB Vaccine) विकसित करने में सफलता हासिल की है। यह खोज दुनिया भर में हर साल टीबी से मरने वाले लाखों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है।

कैसे काम करेगा नया टीका
वैज्ञानिकों ने टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया ‘मायकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्यूलोसिस (Mycobacterium Tuberculosis)’ के करीब 4,000 से अधिक प्रोटीनों की जांच की। इन प्रोटीनों में से उन्होंने ऐसे सक्रिय एंटीजेन (Active Antigens) की पहचान की, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करते हैं। इन्हीं एंटीजेन के आधार पर वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट और असरदार टीका विकसित किया है।
यह नया टीका शरीर की संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं (T-cells) को सक्रिय करेगा। वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की है कि चार हजार प्रोटीनों में से कौन से प्रोटीन संक्रमित मानव कोशिकाओं की सतह पर सक्रिय होते हैं। इन प्रोटीनों की पहचान करने के बाद टीका इस तरह तैयार किया गया कि शरीर की सुरक्षात्मक कोशिकाएं (Protective Cells) उन्हें पहचान सकें और संक्रमण से प्रभावी ढंग से लड़ सकें। अगर यह टीका व्यापक स्तर पर सफल रहता है, तो आने वाले समय में यह टीबी जैसी घातक बीमारी को जड़ से मिटाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। नई टीबी वैक्सीन के जरिए वैज्ञानिक दुनिया भर में हर साल मरने वाले लाखों लोगों की जान बचाने की उम्मीद कर रहे हैं।
चिंता : भारत दुनिया में टीबी के मामले में सबसे आगे
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दुनिया के कुल टीबी मरीजों का 23% सिर्फ भारत में है।
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देश में लगभग 20 लाख (2 मिलियन) लोग टीबी से पीड़ित हैं।
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हर तीन मिनट में दो लोगों की मौत टीबी से हो जाती है।
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भारत में रोज़ाना करीब 1000 मरीज टीबी से मरते हैं।
टीबी के दो मुख्य प्रकार:
फेफड़ों की टीबी (Pulmonary TB): इस प्रकार की टीबी फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह सबसे आम रूप है और संक्रामक होती है, जो तब फैलती है जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है।
फेफड़ों के बाहर की टीबी (Extrapulmonary TB – EPTB): यह टीबी फेफड़ों के बाहर होती है और लसीका ग्रंथियों (lymph nodes), हड्डियों, मस्तिष्क, गुर्दों या फेफड़ों की झिल्ली (pleura) जैसे अंगों को प्रभावित करती है। यह प्रकार कम संक्रामक होती है और आमतौर पर फेफड़ों से शरीर के अन्य भागों में फैलती है।
टीबी का पता देर से क्यों चलता है?
भारत में टीबी की सबसे बड़ी समस्या है—सही समय पर जांच नहीं होना।
1. खून की जांच का गलत उपयोग
लोग अक्सर खून की रिपोर्ट से टीबी ढूंढने की कोशिश करते हैं, जबकि यह तरीका पूरी तरह अविश्वसनीय है।
2. एक्स-रे में दाग देखकर टीबी मान लेना
एक्स-रे में दिखा दाग हमेशा टीबी नहीं होता। कई बार यह पुरानी टीबी का निशान, फंगल इंफेक्शन या अन्य कारणों से भी हो सकता है।
3. अनुमान के आधार पर दवा देना
अक्सर बलगम न मिलने पर डॉक्टर सिर्फ “अनुमान” के आधार पर टीबी की दवा शुरू कर देते हैं। यह तरीका मरीज और सिस्टम—दोनों के लिए खतरनाक है।
4. टीबी न होने पर भी टीबी की दवा देना
यह सबसे बड़ी गलती है, क्योंकि दवा महंगी होती है और लंबी चलती है। टीबी नहीं होने पर दवा देने से लिवर को नुकसान होता है। कई बार यह जानलेवा भी हो सकता है। गलत तरीके से दवा लेने से बैक्टीरिया दवा-प्रतिरोधी (Drug Resistant) बन जाता है, यह भी एक खतरनाक स्थिति है।
भारत में MDR-TB का बढ़ता खतरा
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नए मरीजों में लगभग 4% MDR-TB
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जिन मरीजों को पहले टीबी हो चुकी है, उनमें 20% MDR-TB
यह बढ़ता हुआ आंकड़ा चौंकाने वाला है और बताता है कि गलत इलाज टीबी को और खतरनाक बना रहा है।
टीबी की प्रमुख और कारगर जांच
1. बलगम की जांच (Sputum Examination)
यह टीबी की सबसे जरूरी और विश्वसनीय जांच है:
✔ Smear Microscopy
टीबी बैक्टीरिया को माइक्रोस्कोप से सीधे देखा जाता है।
✔ CBNAAT / GeneXpert
इसके परिणाम सबसे तेज आते हैं और टीबी की पुष्टि भी सटीक होती है।
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2. चेस्ट एक्स-रे
यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध जांच है। टीबी की गंभीरता और वास्तविक स्थिति का पता लगाता है। हालांकि, सिर्फ एक्स-रे से टीबी की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
3. Histopathology / Biopsy
इसके तहत प्रमुख रूप से सीएसएफ, पेट/छाती का पानी, हड्डी, लिम्फ नोड FNAC, एंडोमेट्रियल टिश्यू आदि की जांच की जाती है।
गलत जांच से बचें
टीबी का पता लगाने के लिए कुछ और भी प्रचलित जांच हैं। हालांकि, इसके रिजल्ट सटीक नहीं होने और इसकी प्रक्रिया काफी महंगी होने के कारण भारत सरकार ने इन सभी को प्रतिबंधित किया है: इनमें TB Gold, TB Platinum, ELISA और एंटीबॉडी टेस्ट शामिल हैं। ये टेस्ट महंगे होते हैं और इनके परिणाम विश्वसनीय नहीं हैं।
- डॉ. सुभाष चंद्र झा, कार्डियोथोरासिक सर्जन, पीएमसीएच, पटना से बातचीत पर आधारित

