आयुष विशेषज्ञों की मांग है कि भांग (Cannabis) को चिकित्सीय उपयोग के लिए मंजूरी दी जाए। दिल्ली उच्च न्यायालय में इसको लेकर एक याचिका भी डाली गई थी। मैरिजुआना धरती पर सबसे प्रचलित नशीला पदार्थ है। भारत में इसके प्राकृतिक रूप(पत्ते) को भांग कहते हैं। जबकि इसकी अन्य प्रजातियों व बीज आदि से चरस, गांजा, हशीश बनाया जाता है, जिसके कारण इसे बैन किया गया है। इसका दूसरा नाम कैनबिस भी है। यह कैनबिस सैटाइवा नाम के पौधे से प्राप्त होता है। इसे गांजा के पौधे से भिन्न-भिन्न विधियों (गांजा, चरस और भांग) से बनाया जाता है।
कनाडा, अमेरिका, इजराइल सहित कई देशों में वैध:
भांग को वैध बनाने वाला कनाडा, उरुग्वे के बाद दुनिया का दूसरा देश है। दिसंबर, 2013 में सबसे पहले उरुग्वे ने भांग के उत्पादन, बिक्री और खपत को वैध किया था। वर्तमान कानून के तहत कनाडा के लोग अब अपने घर में चार पौधे लगा सकते हैं और व्यक्तिगत उपयोग के लिए 30 ग्राम सूखी भांग रख सकते हैं। इसके अतिरिक्त कनाडा के सभी प्रांतों को भांग के बिजनेस को नियमित बनाने के लिए लाइसेंस देने की अपनी व्यवस्था कायम करने की भी अनुमति दी गई है। वर्ष 2001 से कनाडा में इसे औषधि उपयोग के लिए कानूनी मंजूरी प्राप्त है। इसी तरह जॉर्जिया और दक्षिण अफ्रीका में अदालत के फैसलों ने व्यक्तिगत खेती और भांग की खपत को वैध बनाने का नेतृत्व किया है, लेकिन वहां व्यापार वैध नहीं है। जिन देशों ने भांग के चिकित्सीय उपयोग को वैध बनाया है, उनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, कोलंबिया, जर्मनी, ग्रीस, इजराइल, इटली, नीदरलैंड, पेरू, पोलैंड, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम (1 नवंबर, 2018 से प्रभावी) शामिल हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में 31 राज्यों और कोलंबिया जिले ने भांग के चिकित्सा उपयोग को वैध बनाया है, लेकिन संघीय स्तर पर इसका उपयोग व्यापारिक उपयोग नहीं किया जा सकता है। नौ अमेरिकी राज्यों, वाशिंगटन डीसी में मारिजुआना का मनोरंजक उपयोग यानी मजे के लिए उपयोग करना कानूनी है। थाइलैंड की नेशनल असेंबली द्वारा एक विधेयक पारित किया गया, जिसमें भांग (मारिजुआना) और परंपरागत औषधीय पौधे क्रेटम पर शोध तथा चिकित्सीय उपयोग को कानूनी मान्यता दी गई है। इस नए कानून से भांग के उत्पादन, आयात और निर्यात में मदद मिली है। किसी एशियाई देश में किसानों को आर्थिक लाभ दिलाने वाली इस तरह की यह पहली कोशिश है। इजराइल की संसद नेसेट ने भी गांजा के मेडिकल उपयोग के लिए निर्यात को कानूनी मान्यता प्रदान की है।
भारत में स्थिति:
भारत में मादक पदार्थों के संदर्भ में नारकोटिक ड्रग एवं सायकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985 (The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) बनाया गया था, जिसे प्रभावी बनाने के लिए 2014 में संशोधन बिल लाया गया। इसके आधार पर 2015 में नया कानून बनाया गया। यह एक्ट चरस, गांजा या फिर कैनबिस के दूसरे रूपों को पूरी तरह प्रतिबंध लगाता है। हालांकि, इस कानून में कैनबिस की परिभाषा में भांग को नहीं जोड़ा गया है। इसकी वजह भांग का धर्म से जुड़ाव होना भी है। भारत में भांग को प्रसाद के रूप में उपभोग करने का चलन रहा है। यही कारण है कि इसकी महत्ता समाज में बनी हुई है। विश्व में भांग के बढ़ते महत्त्व को देखते हुए हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने भांग की फसल उगाने के लिए इंडियन इंडस्ट्रियल हेंप एसोसिएशन (Indian Industrial HEMP Association) को लाइसेंस जारी किया है।
भांग का औषधीय उपयोग
चिकित्सीय दृष्टिकोण से भांग में उत्तेजक (Inflammatory) गुण होता है, जो बदन दर्द, बुखार जैसी समस्या को दूर करने में बहुत लाभकारी औषधि हो सकती है। इसके साथ ही इसके उत्तेजक गुण कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी राहत दिलाने में काफी फायदेमंद होते हैं। इंसानों और जानवरों पर किए गए प्रयोगों के आधार पर अध्ययन में यह पाया गया है कि इनका इस्तेमाल मिर्गी, पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी दुर्घटना के बाद होनेवाले मानसिक विकार या तनाव, अल्जाइमर, पार्किंसंस, सिकल सेल और स्क्लीरोसिस जैसी बीमारियों के उपचार में किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भी यह दावा किया गया है कि भांग का उपयोग चिकित्सीय तौर पर किया जा सकता है। इसमें एडिक्शन पैदा करने वाले कोई कारक नहीं हैं।
- विपक्ष में तर्क:
• भांग-गांजा के सेवन से बहुत ज्यादा अपराधिक घटनाएं होती हैं। ऐसे में समाज में जो नशे के लिए कारण दिए जाते हैं, वो सभी पर लागू होते हैं।
• कैनबिस को वैधता देने से जो काम चोरी-छिपे होता है, वह खुलेआम होने लगेगा। इसका गंभीर परिणाम हो सकता है।
• ठीक इसी तरह जब सिगरेट के अंदर निकोटिन को लेकर बहस चल रही थी कि इसको वैधता दिया जाए या नहीं तब भी कई लोगों ने इस पर आपत्ति दर्ज की थी, इसके बावजूद इसे वैध किया गया। जिसके बुरे प्रभाव देखने को मिले रहे हैं।
• आज सिगरेट पीने से इतनी गंभीर बीमारियां हो रही हैं कि सरकार को कैंपेन पर करोड़ों खर्च करने पड़ रहे हैं।
सरकार शोध करवाए :
आज बहुत सारे देशों में जहां इसे प्रतिबंधित किया गया था, वे भी भांग के फायदे को लेकर रिसर्च कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि भारतीय स्तर पर भी इसी तरह के रिसर्च हों। सरकार इसे देश में वैधता दे या न दे, लेकिन इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। अगर इसका अच्छा प्रभाव सामने आता है, तो सरकार को इसे वैधता देनी चाहिए। इसके लिए सरकार को कुछ सावधानियों पर भी ध्यान देनी चाहिए जैसे-
• कैनबिस (भांग) का व्यावसायीकरण उस स्तर का ना हो सके जैसे अमेरिका में देखा जा रहा है। आज वहाँ कैनबिस को आइस्क्रीम सॉफ्ट ड्रिक्स आदि रूपों में परोसा जा रहा है।
• भारत सरकार को चाहिए कि वह बच्चों, युवा या फिर वे लोग जो किसी प्रकार भांग का प्रयोग कर रहे हैं उन्हें इसके गलत प्रभावों की जानकारी दे।
• सरकार को चाहिए कि वे उन लोगों को जो भांग के आदि हो चुके हैं, उन्हें अच्छी स्वास्थ्य व सुविधा उपलब्ध कराए।

