मुजफ्फरपुर। बिहार में स्वस्थ मातृत्व की ओर कदम उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने Ferric Carboxymaltose Injection (FCM) थेरेपी की शुरुआत की है। विशेष अभियान के तहत सूबे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसकी शुरुआत की। इस पहल को राज्य में एनीमिया से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मौके पर विभिन्न प्रखंडों से 17 एनीमिक गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया। वहां उन्हें FCM थेरेपी दी गई और उपचार के बाद सुरक्षित घर वापस पहुंचाया गया।
मुजफ्फरपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम
राज्यस्तरीय लॉन्च के साथ ही मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार और जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ ने की। इस दौरान अधीक्षक डॉ. ज्ञानेन्दु शेखर, डॉ. प्रेरणा सिंह, प्रवीण कुमार, राज किरण कुमार, आशा प्रतिनिधि और अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 57 चिन्हित एनीमिक लाभार्थियों में से 28 महिलाएं FCM थेरेपी के लिए पात्र पाई गईं। लाभार्थियों को लाने में प्रखंड स्तर के सामुदायिक उत्प्रेरकों का विशेष योगदान रहा।
बिहार में एनीमिया की स्थिति चिंताजनक
इस अवसर पर मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार कि बिहार में लगभग 63% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत 63.9% तक पहुंच जाता है, जो राष्ट्रीय औसत 52% से काफी ज्यादा है। यह स्थिति राज्य के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है।

अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष व्यवस्था
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।
- एनीमिक गर्भवतियों को अस्पताल तक लाने और उपचार के बाद सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सुविधा।
- प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की तैनाती।
- राज्यस्तर पर मास्टर ट्रेनर्स की सूची जारी।
- कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सभी जिला अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए।
FCM थेरेपी के लिए स्पष्ट गाइडलाइन:
स्वास्थ्य विभाग ने FCM थेरेपी के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है:
- मध्यम एनीमिया (Hb 7–9.9 g/dl) में 34 सप्ताह से अधिक गर्भावस्था होने पर FCM को प्राथमिक उपचार के रूप में दिया जाएगा।
- 34 सप्ताह से कम गर्भावस्था में, जब ओरल आयरन असर नहीं करता, तब FCM थेरेपी का उपयोग किया जाएगा।
- गंभीर एनीमिया (Hb 5–6.9 g/dl) वाली 13 से 34 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं के लिए IV आयरन (FCM) को प्राथमिक उपचार बनाया गया है।
- प्रसव के बाद 42 दिनों तक यदि हीमोग्लोबिन 5–9.9 g/dl के बीच हो, तो चिकित्सकीय सलाह पर यह थेरेपी दी जा सकती है।
- डोज की गणना Ganzoni Formula से की जाएगी, ताकि प्रत्येक मरीज को सही मात्रा में आयरन मिल सके।
- इंजेक्शन के दौरान और बाद में कम से कम 30 मिनट तक मरीज की निगरानी अनिवार्य होगी।
- साथ ही, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मातृ स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह अभियान मातृ मृत्यु दर (maternal mortality rate) को कम करने और “एनीमिया मुक्त बिहार” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मजबूत पहल है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि FCM थेरेपी के प्रभावी क्रियान्वयन से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होगा और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलेगा।

