भारत में लोग दंत चिकित्सक के पास तभी जाते हैं, जब दांतों में उनको तेज दर्द हो और वह असहनीय हो जाए। हालांकि, दांतों की समस्या उन्हें छह माह या सालभर पहले ही शुरू हो चुकी होती है। दांतों को लेकर इस तरह की लापरवाही न सिर्फ उनके दांतों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मसूड़ों में भी सड़न पैदा करती है। अंतत: मरीज ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है, जहां मरीज को डेंटल इंप्लांट की जरूरत पड़ती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि नियमित रूप से दांतों की सफाई कराई जाए और दंत चिकित्सक की सलाह ली जाए तो डेंटल इम्प्लांट या फिर दांतों के प्रत्यर्पण (Dental Implant) के प्रोसेस से बचा जा सकता है। हालांकि, यदि स्थिति ज्यादा खराब हो जाए तो डेंटल इंप्लांट बेहतर विकल्प है।

रांची के सदर अस्पताल में शुरू हुआ डेंटल इंप्लांट
रांची के सदर अस्पताल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आज तीन तत्काल डेंटल इम्प्लांट सफलतापूर्वक लगाए। यह सेवा एक एडेंटुलस (दांतहीन) मरीज़ के लिए दी गई, और यह झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
झारखंड में डेंटल सेवा के क्षेत्र में यह पहला मौका है जब किसी ज़िला अस्पताल ने इस तरह की आधुनिक सुविधा शुरू की है। सदर अस्पताल, रांची अब राज्य का पहला ज़िला अस्पताल बन गया है जहाँ सरकारी अस्पताल में डेंटल इम्प्लांट की सुविधा उपलब्ध है — कई मेडिकल कॉलेज भी अभी इस स्तर तक नहीं पहुँच पाए हैं।
इस प्रक्रिया का सफल संचालन डॉ. रवि राज (MDS विशेषज्ञ) द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने कुशल अनुभव से यह कार्य बेहद सफलतापूर्वक पूरा किया। आने वाले समय में अस्पताल में एक समर्पित डेंटल इम्प्लांट विंग शुरू की जाएगी, जिससे इलाज और भी सुविधाजनक होगा।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निजी क्लीनिकों में दांत प्रत्यारोपण की कीमत ₹30,000 से ₹80,000 प्रति दांत तक हो सकती है। वहीं सदर अस्पताल में यह सेवा बहुत ही कम शुल्क में प्रदान की जा रही है, जिससे यह एक सस्ता डेंटल इम्प्लांट विकल्प बनकर उभरा है। सिविल सर्जन ने इस उपलब्धि पर खुशी ज़ाहिर की और कहा कि इससे आम जनता को बड़ा फायदा मिलेगा।


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