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Sehatnama > Blog > Health & Diseases > एनीमिया से लड़ने को आज से शुरू होगी FCM थेरेपी
Health & DiseasesWomen's Health

एनीमिया से लड़ने को आज से शुरू होगी FCM थेरेपी

Sehatnama desk
Last updated: 2026/03/26 at 6:39 AM
By Sehatnama desk
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4 Min Read
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Highlights
  • आयरन की गोलियां नियमित रूप से लेने से एनीमिया को दूर किया जा सकता है, पर इसके लिए खान-पान पर और रहन-सहन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

मुजफ्फरपुर, बिहार | महिलाओं में खून की कमी और बिगड़ती स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार ने 26 मार्च 2026 से राज्यव्यापी पहल की है। इसके तहत बिहार के सभी जिलों में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (Ferric carboxymaltose Or FCM) थेरेपी अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान खून की गंभीर कमी (एनीमिया) से जूझ रही महिलाओं को प्रसव पूर्व सुरक्षित और प्रभावी उपचार प्रदान करना है।

Contents
एनएफएचएस-5 के आंकड़े: क्यों जरूरी है यह अभियान?क्या है एनीमिया:मुजफ्फरपुर में तैयारियां: 20 बेड और एम्बुलेंस सुविधाविशेषज्ञों की देखरेख में हाई-टेक निगरानीक्या है FCM थेरेपी और यह क्यों है ‘वरदान’?

एनएफएचएस-5 के आंकड़े: क्यों जरूरी है यह अभियान?

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार की लगभग 63% गर्भवती एनीमिया की शिकार हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 63.9% तक पहुंच जाता है। इसी आपात स्थिति को देखते हुए भारत सरकार के दिशा-निर्देशों पर मुजफ्फरपुर के स्वास्थ्य ढांचे को ‘वार मोड’ पर सक्रिय किया गया है।

क्या है एनीमिया:

एनीमिया ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी, थकान, त्वचा का पीलापन और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे जाते हैं। यह अक्सर आयरन, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी, शरीर में खून की कमी या पुरानी बीमारियों के कारण होता है। हरी साग-सब्जियां, ताजे मौसमी फल, स्प्राउट्स आदि का सेवन तथा नियमित रूप से आयरन और विटामिन-बी12 की गोलियां लेकर इससे होनेवाले जोखिम को कम किया जा सकता है।

मुजफ्फरपुर में तैयारियां: 20 बेड और एम्बुलेंस सुविधा

अभियान की सफलता के लिए जिला अस्पताल और प्रथम रेफरल इकाइयों (FRU) को विशेष रूप से सुसज्जित किया गया है।

  • विशेष वार्ड: हर केंद्र पर कम से कम 20 बेड और पर्याप्त आईवी (IV) स्टैंड सुनिश्चित किए गए हैं।
  • मरीजों का चयन: प्रथम चरण में 20 अति-गंभीर एनीमिया पीड़ित महिलाओं को चिन्हित किया गया है।
  • पिक-एंड-ड्रॉप सेवा: जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि प्रशासन की ओर से महिलाओं को घर से अस्पताल लाने और उपचार के बाद सुरक्षित वापस छोड़ने के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था की गई है।
infographics of anaemia in India

विशेषज्ञों की देखरेख में हाई-टेक निगरानी

उपचार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डॉ. रेखा कुमारी और डॉ. स्नेहल जैसी वरिष्ठ चिकित्सकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यस्तर पर इसकी शुरुआत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी इससे सीधे तौर पर जुड़ सकेंगे।

क्या है FCM थेरेपी और यह क्यों है ‘वरदान’?

मुजफ्फरपुर के डीपीएम रेहान अशरफ के अनुसार, FCM थेरेपी पारंपरिक आयरन की गोलियों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं।

  1. त्वरित सुधार: यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बहुत तेजी से बढ़ाती है।
  2. किनके लिए है जरूरी: उन महिलाओं के लिए जिन्हें आयरन की गोलियां सूट नहीं करतीं या जिनकी गर्भावस्था 34 सप्ताह पार कर चुकी है।
  3. सुरक्षित प्रसव: यह डिलीवरी के समय होने वाली संभावित जटिलताओं और ‘पोस्टपार्टम हेमरेज’ (PPH) के जोखिम को न्यूनतम कर देती है।

स्वास्थ्य विभाग ने “एनीमिया मुक्त बिहार” के संकल्प के साथ सभी संबंधित अधिकारियों को समय पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। यह अभियान न केवल माताओं की जान बचाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी स्वस्थ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

TAGGED: AnemiaFreeBihar, FCMTherapy, HealthNews, MuzaffarpurHealthNews, एनीमिया_मुक्त_बिहार, बिहार में एनीमिया, भारत में एनीमिया
Sehatnama desk March 26, 2026 March 25, 2026
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1 Comment 1 Comment
  • Isaac3116 says:
    March 27, 2026 at 6:23 am

    good

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