खाने की चीजों में एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष मिल रहे हैं। इससे लोगों में बैक्टीरिया के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती जा रही है। एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस Antimicrobial Resistance बढ़ रहा है। यह एक खतरनाक स्थिति है, क्योंकि जिन लोगों में ऐसी स्थिति बन रही है, उनपर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हो रहा है और उन्हें ज्यादा डोज की दवा खानी पड़ रही है। इसी को देखते हुए खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक अवशेषों को लेकर जागरूकता और नियंत्रण बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण या Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने महत्वपूर्ण सेक्टोरल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का आयोजन किया। यह बैठक FDA Bhawan, New Delhi में आयोजित की गई।
70 से अधिक विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि शामिल
इस परामर्श बैठक में 70 से अधिक स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया, जिनमें सरकारी विभागों, फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) संगठनों और खाद्य उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक अवशेषों की निगरानी, नियमों के पालन और प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा करना था।
बैठक में इन अहम मुद्दों पर चर्चा
1. पशु चिकित्सा दवाओं के नियमों की समीक्षा
Food Safety and Standards (Contaminants, Toxins and Residues) Regulations, 2011 के तहत पशु चिकित्सा दवाओं की समीक्षा पर विचार किया गया।
2. एंटीबायोटिक उपयोग पर लेबलिंग फ्रेमवर्क प्रस्ताव
पशु आधारित खाद्य उत्पादों पर एंटीबायोटिक उपयोग से संबंधित जानकारी देने के लिए लेबलिंग फ्रेमवर्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।
3. नियामक परिभाषाओं को मजबूत करने की जरूरत
खाद्य सुरक्षा नियमों को और स्पष्ट और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक नियामक परिभाषाओं को शामिल करने पर चर्चा हुई।
4. AMU और AMR पर ड्राफ्ट गाइडलाइन
Antimicrobial Use (AMU) और Foodborne Antimicrobial Resistance (AMR) पर ड्राफ्ट गाइडेंस डॉक्यूमेंट पर विचार किया गया।
स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है यह पहल?
- खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक अवशेष कम होंगे
- एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा घटेगा
- उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलेगा
- पशु आधारित खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी बढ़ेगी
FSSAI ने स्पष्ट किया कि वह विज्ञान आधारित, पारदर्शी और सहयोगात्मक दृष्टिकोण से खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह की पहल से भविष्य में सुरक्षित खाद्य आपूर्ति और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक अवशेष से बढ़ रहा स्वास्थ्य खतरा: अध्ययन में खुलासा
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों ने खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक अवशेषों की मौजूदगी को लेकर हालिया अध्ययन में चिंता जताई है। उनके अनुसार, पशुपालन और खाद्य उत्पादन में एंटीबायोटिक का अधिक या गलत उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
अध्ययन के अनुसार, दूध, मांस और अंडे जैसे पशु आधारित खाद्य पदार्थों में एंटीबायोटिक अवशेष पाए जा रहे हैं। ये अवशेष शरीर में पहुंचकर एलर्जी, लीवर सिरोसिस, फैटी लीवर और किडनी या पेशाब से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। साथ ही, लंबे समय तक कम मात्रा में एंटीबायोटिक शरीर में जाने से बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (Antimicrobial Resistance – AMR) बन जाती हैं, जिससे भविष्य में संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि पशुपालन में एंटीबायोटिक का सीमित और नियंत्रित उपयोग किया जाए। साथ ही, खाद्य उत्पादों की नियमित जांच और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की दिल्ली में हो रही बैठक।
क्या है भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
यह भारत की प्रमुख सरकारी खाद्य नियामक संस्था है, जो देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है। FSSAI खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और आयात से जुड़े नियम और मानक तय करती है, ताकि लोगों को सुरक्षित और शुद्ध भोजन मिल सके। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
FSSAI के मुख्य कार्य
- खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के मानक बनाना
- खाद्य व्यवसायों को लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन देना
- खाद्य पदार्थों की जांच और निगरानी करना
- मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पर रोक लगाना
- लोगों में सुरक्षित भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाना


