रांची : झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में 10 फरवरी, 2026 से एक बड़ा कदम उठाया गया। रांची के उप विकास आयुक्त (DDC) सौरभ कुमार भुवानिया ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कांके में जिला स्तरीय फाइलेरिया मुक्ति कार्यक्रम (MDA) की औपचारिक शुरुआत की। यह अभियान आज से 25 फरवरी 2026 तक रांची के चार प्रमुख प्रखंडों— राहे, सोनहातू, तमाड़ और कांके में चलाया जाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में डॉ प्रभात कुमार,सिविल सर्जन रांची, वीरेंद्र कुमार सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी VBD, विजय कुमार प्रखंड विकास पदाधिकारी, डॉ शाहिद करीम साबरी जिला वेक्टर बोर्न नियंत्रण पदाधिकारी, डॉ सीमा गुप्ता, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कांके, राज्य स्तर से सज्ञा श्रीवास्तव एवं नीलम कुमार, अंजलि गांगुली, प्रधानाध्यापिका, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, डॉ अभिषेक पॉल- WHO, जोसेफ किरण कुमार -EISAI एवं पिरामल संस्था की टीम, जिला कार्यक्रम प्रबंधक एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए l
“दवा सुरक्षित है, घबराएं नहीं”
कार्यक्रम के दौरान उप विकास आयुक्त ने न केवल जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाई, बल्कि खुद फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर समाज को सुरक्षा का संदेश दिया। उन्होंने स्कूली छात्राओं, सुषमा (17 वर्ष) और निशा (15 वर्ष) को भी अपने हाथों से दवा खिलाई। DDC ने इस अवसर पर कहा, “फाइलेरिया का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव ही एकमात्र रास्ता है। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और फाइलेरिया मुक्त झारखंड के निर्माण के लिए हर नागरिक का सहयोग जरूरी है।”

5.57 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य :
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लक्ष्य: चार प्रखंडों के लगभग 5,57,970 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य।
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नेटवर्क: 619 बूथों पर 1,238 प्रशिक्षित दवा प्रशासक तैनात।
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कवरेज: आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक भवनों पर बूथ उपलब्ध।
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सावधानी: दवा खाली पेट न खाएं। 2 वर्ष से कम के बच्चे, गर्भवती और गंभीर बीमार व्यक्ति यह दवा न लें।
दवा खाने के बाद आने वाले लक्षणों से घबराएं नहीं:
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने इस बारे में बताया कि फाइलेरिया (हाथी पांव) मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। यह जानलेवा तो नहीं, लेकिन व्यक्ति को जीवनभर के लिए दिव्यांग बना देता है। जिला वेक्टर बोर्न नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शाबरी ने स्पष्ट किया कि दवा खाने के बाद मामूली सिरदर्द, उल्टी या चक्कर आना सामान्य है। यह इस बात का संकेत है कि दवा शरीर के अंदर मौजूद फाइलेरिया के कीटाणुओं को खत्म कर रही है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
शपथ और जागरूकता रथ
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों और विद्यार्थियों ने ‘फाइलेरिया मुक्त झारखंड’ बनाने की शपथ ली। “मच्छर का एक काट, बना सकता है हाथी पांव। आज ही अपने नजदीकी बूथ पर जाएं और फाइलेरिया की दवा खाकर सुरक्षित बनें। याद रखें—दवा सुरक्षित है, आप सुरक्षित हैं!”
जागरूकता रथ के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को इस बीमारी के लक्षणों और बचाव के प्रति सचेत किया जाएगा।

