रांची: तीन दिवसीय EHG-2025 (ईस्टर्न हेमेटोलॉजी ग्रुप) कॉन्फ्रेंस का समापन रांची में हुआ, जिसमें भारत भर के 60 से ज्यादा हेमेटोलॉजिस्ट और 450 से ज्यादा डॉक्टरों ने भाग लिया। सम्मेलन में सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, ब्लड कैंसर, और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर रक्त विकारों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि झारखंड में अर्ली स्क्रीनिंग, जागरूकता और रेफरल सेंटर की सख्त ज़रूरत है। यह आयोजन झारखंड के स्वास्थ्य तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ।

स्वास्थ्य समस्याओं पर केंद्रित रहा पूरा आयोजन
तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल संवाद में 60 से अधिक हेमेटोलॉजी विशेषज्ञ और 450 से ज्यादा डॉक्टरों ने भाग लिया। सिकल सेल एनीमिया, जो झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है, पर विशेष चर्चा की गई। झारखंड के 120 से अधिक स्थानीय चिकित्सकों ने इसमें हिस्सा लिया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. (Col) ज्योति कोतवाल (प्रोफेसर, श्री गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली) ने की। उन्होंने कहा कि, “सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के लिए झारखंड में रेफरल सेंटर की आवश्यकता है ताकि रोगियों का समय पर निदान और इलाज सुनिश्चित किया जा सके।”
सिकल सेल मिशन, ब्लड कैंसर, और जनजा
गरूकता
सम्मेलन के दौरान, ब्लड कैंसर (Leukemia), जीन थेरेपी, लो ब्लड काउंट, Low TLC, और लिम्फोमा जैसे रक्त विकारों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। डॉ. शैलेंद्र प्रसाद वर्मा (KGMU, लखनऊ) ने बताया कि, “अधिकांश रक्त रोगियों की पहचान बहुत देर से होती है, जिससे इलाज की जटिलता बढ़ जाती है।”
ब्लड कैंसर का शुरुआती जांच और स्क्रीनिंग के ज़रिए इलाज संभव है। यदि समय रहते इस बीमारी का पता चल जाए तो कीमोथेरेपी, स्टेम सेल और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए मरीज लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
झारखंड में जन स्वास्थ्य की चुनौतियां और समाधान
डॉ. अभिषेक रंजन (ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री, EHG) ने बताया कि, “झारखंड हेमेटोलॉजी के क्षेत्र में अब भी काफी पीछे है। हमें जरूरत है कि सहिया (आशा वर्कर) और आंगनवाड़ी कर्मियों के जरिए गांव-गांव में जाकर लोगों को रक्त विकारों के प्रति जागरूक किया जाए।” कार्यक्रम में बताया गया कि अब कई जिला अस्पतालों में HPLC मशीनें लग चुकी हैं जिससे सिकल सेल की जांच सरल हो गई है। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं में सिकल सेल की स्क्रीनिंग के लिए अलग से रेफरल सेंटर बनाए जा रहे हैं।

नई तकनीक और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा
कॉन्फ्रेंस के दौरान, हेमेटोलॉजी पर केस प्रेजेंटेशन देने वाले रेजिडेंट डॉक्टर्स को सम्मानित किया गया। डॉ. अजय के महलका (EHG को-सेक्रेट्री) ने कहा कि, “सभी चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस कॉन्फ्रेंस में कई नई तकनीकों पर चर्चा की गई जो भविष्य में मरीजों के बेहतर इलाज में मददगार साबित होंगी।”
एक अत्याधुनिक जेनेटिक लैब की स्थापना की आवश्यकता पर भी बल दिया गया ताकि मरीजों को जांच की बेहतर सुविधा मिल सके। रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि, “EHG-2025 कॉन्फ्रेंस से झारखंड के डॉक्टरों को अत्यंत लाभ हुआ है। अब हमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को इस दिशा में और मजबूत करना होगा।” यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण कदम रहा। झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और रक्त संबंधित बीमारियों के शीघ्र निदान और उपचार में इससे मदद मिलेगी।


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