“एनीमिया एक गंभीर जन स्वास्थ्य चुनौती है। झारखंड सहित पूरे भारत में हर समूह (आर्थिक व सामाजिक) के लोग एनीमिया से पीड़ित हैं। इसलिए इस समस्या को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है । आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया के कारण बच्चों का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास बाधित होता है । इसलिए समय पर सभी बच्चों को आयरन और फोलिक एसिड की टेबलेट दी जानी जरूरी है।” ये कहना है रांची के DRCHO डॉ असीम कुमार मांझी का। वे “एनीमिया मुक्त भारत” (Anaemia Free India)” कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। जिसका आयोजन रांची के सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में किया गया था।

इस दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह ने स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र में उपलब्ध कराए गए आयरन की ब्लू और पिक गोली और गर्भवती तथा माताओं को उपलब्ध कराए जा रहे लाल आयरन गोली के बारे में जानकारी दी । उन्होंने कहा कि झारखंड में तकरीबन 67% बच्चे एनीमिया से ग्रसित है, वहीं 55% गर्भवती और माताएं एनीमिया से ग्रसित हैं। उन्होंने कहा कि आयरन की गोलियां नियमित रूप से लेने से एनीमिया को दूर किया जा सकता है, पर इसके लिए खान-पान पर और रहन-सहन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
क्या है एनीमिया:
एनीमिया ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी, थकान, त्वचा का पीलापन और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे जाते हैं। यह अक्सर आयरन, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी, शरीर में खून की कमी या पुरानी बीमारियों के कारण होता है। हरी साग-सब्जियां, ताजे मौसमी फल, स्प्राउट्स आदि का सेवन तथा नियमित रूप से आयरन और विटामिन-बी12 की गोलियां लेकर इससे होनेवाले जोखिम को कम किया जा सकता है।
नेशनल हेल्थ सर्वे (2019-2021) के अनुसार भारत में…
- 59% छ: माह से 59 माह के बच्चे भारत में एनीमिया से पीड़ित
- 52% पंद्रह से 49 साल की गर्भवतियों में एनीमिया के मामले पाए गए
- 59% पंद्रह से 19 साल की किशोरियां भारत में खून की कमी से जूझ रहीं
- 31% पंद्रह से 19 साल के किशोरों में भी एनीमिया के मामले पाए गए
- 25% भारतीय पुरुष भी खून की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं…
फास्टफूड से बढ़ रही समस्या:
कार्यक्रम में क्षेत्रीय समन्वयक, एविडेंस एक्शन डॉ नीरज कुमार ने बच्चों, किशोर-किशोरियों एवं महिलाओं में एनीमिया को कम करने के लिए जागरूकता फैलाने साथ ही आयरन फोलिक एसिड की खुराक समय पर लेने को लेकर सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी खाना, खासकर फास्टफूड के प्रचलन से टीनएज में एनीमिया के मामले बढ़े हैं। पूर्व में भोजन की कमी की वजह से यह समस्या उत्पन्न होती थी। हालांकि, अब मोटापा के साथ भी यह समस्या देखने को मिल रही है। इसका कारण यह है कि अक्सर किशोर-किशोरियां होटल, रेस्ट्रां और नुक्कड़ पर भी ठेले पर अनहाइजीनिक और कई बार उपयोग किया गया तैलीय आहार, मैदा और रिफाइंड तेल में बनाया गया आहार का सेवन करते हैं। इसमें पिज्जा, बर्गर, मोमोज, समोसा, चाट, रोल, चाऊमीन आदि का सेवन करते हैं। इनमें रिफाइंड तेल के साथ मिलावटी सॉस और मसालों का उपयोग किया जाता है। जो पाचनतंत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ हृदय, धमनियों और शरीर के अन्य भाग को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही खून में ट्राईग्लिसराइड को बढ़ाते हैं, जिससे हृदय रोग की समस्या भी हो सकती है।
अभियान का लक्ष्य
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6 महीने से 59 महीने तक के बच्चे,
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5–9 वर्ष के बच्चे,
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10–19 वर्ष के किशोर,
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और 15–49 वर्ष की गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नियमित रूप से आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट उपलब्ध कराना, ताकि एनीमिया की दर कम हो और उनका संपूर्ण विकास सुनिश्चित हो सके।

