रांची: मानसिक स्वास्थ्य कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि व्यक्तिगत सोच, भावनाएं और व्यवहार को संभालने की क्षमता। साथ ही सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां भी इसमें प्रमुख कारक होती हैं। मनोवैज्ञानिक, व्यक्तित्व और आनुवंशिक कारण भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति रांची और टेली मानस झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में रांची वीमेंस कॉलेज में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत तनाव मुक्ति शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति में छात्राओं की वन-ऑन-वन काउंसलिंग की गई। छात्राओं ने भी अपने मन की बात जैसे- घर-परिवार, करियर और इमोशनल चीजों के बारे में अपनी उलझनों को साझा किया। मौजूद डॉक्टरों ने छात्राओं की बातों को गौर से सुना और उनकी परेशानियों को लेकर उपाय सुझाए। कुछ छात्राओं को जरूरत के हिसाब से दवाइयों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन के सदस्यों ने भी सहयोग किया।
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की प्राचार्या डॉ. विनीता सिंह की देखरेख में हुआ। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया गया। गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा संदेश दिया गया और जरूरतमंद छात्राओं को वन-ऑन-वन काउंसलिंग भी दी गई।
कार्यक्रम में जिला स्वास्थ्य समिति से जिला नोडल पदाधिकारी (एनसीडी कोषांग) डॉ. सीमा गुप्ता, जिला कार्यक्रम सहायक अभिषेक कुमार, जिला फाइनेंस लॉजिस्टिक कंसल्टेंट सरोज कुमार मौजूद रहे। टेली मानस टीम से डॉ. प्रीथा रॉय, डॉ. मुजम्मिल अहसान, विजय लक्ष्मी दोराई और महजबीन नियाजी उपस्थित रहे।

कॉलेज की ओर से डॉ. रेणु कुमारी, डॉ. आरती मोदक, डॉ. गीता सिंह, डॉ. कुमारी उर्वशी और डॉ. हर्षिता सिन्हा मौजूद रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस छात्राओं, लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन के सीनियर एग्जीक्यूटिव सोशल डेवलपमेंट नीरज कुमार और उनकी टीम के सदस्यों अंजू, प्रवीण और मानसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
क्यों जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य:
स्वास्थ रहने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी है। यह व्यक्ति के अच्छे जीवन, संतुलित सोच और प्रभावी कार्य करने की क्षमता के लिए अहम कारक है। इसमें सुख-समृद्धि, मानसिक बीमारियों की रोकथाम, उनका इलाज और पुनर्वास शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ काफी अधिक है। भारत में औसतन प्रति एक लाख लोगों में 21 व्यक्ति आत्महत्या का कदम उठा लेते हैं। वर्ष 2012 से 2030 के बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लगभग 1.03 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये) के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति 2014 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के अनुसार मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए समुचित इलाज, उनका सही से देखभाल और काउंसेलिंग के लिए कानून की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर व प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर बेहतर सेवाएं सरकार की जिम्मेवारी है। सरकार और एनजीओ की ओर से नशा मुक्ति केंद्र और पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जागरूकता और समय पर इलाज का जरूरी:
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है ताकि लोग समय पर मदद ले सकें। इसके लिए ऐसा माहौल बनाना जरूरी है जो लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करे। इसमें सरकार, समाज और सभी क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी है।
मानसिक बीमारियों का समय पर इलाज बहुत जरूरी है। इसके लिए रोकथाम, उपचार और रिकवरी की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए और आम मानसिक बीमारियों का सस्ता और आसान इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर उपलब्ध होना चाहिए।


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