विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लाखों महिलाएं गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याओं से जूझती हैं और समय पर देखरेख के अभाव में उनकी या फिर नवजात की मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाता है। यूनिसेफ इंडिया (unicef india) के अनुसार, 2018-2020 में प्रति एक लाख Pregnant महिलाओं में से 97 महिलाओं की मौत हाइपरटेंशन के कारण हो जा रही है। यह आंकड़ा 2014-16 में 130 महिला प्रति एक लाख थी। इस आंकड़ों के अनुसार जहां 2016 में मातृ मृत्यु दर प्रति वर्ष 33800 थी, वहीं 2020 में 25,220 महिलाओं की मौत प्रेग्नेंसी के दौरान हो गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मातृ मृत्यु दर में कमी आने के बावजूद यह संख्या अभी भी काफी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और उसके सहयोगी संगठनों ने गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी गंभीर समस्याओं, विशेष रूप से प्री-एक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia), से निपटने के लिए नया वैश्विक रोडमैप जारी किया है। वर्ष 2026 से 2035 और उसके बाद तक के लिए तैयार इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौतों को रोकना तथा समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना है।
दुनिया भर में 10 से 15 प्रतिशत गर्भावस्थाएं प्रभावित
WHO के अनुसार, गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित विकार दुनिया भर में लगभग 10 से 15 प्रतिशत गर्भावस्थाओं को प्रभावित करते हैं। ये विकार वैश्विक स्तर पर मातृ मृत्यु के करीब 16 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। इन समस्याओं के कारण हर साल करीब 42,000 मौतें होती हैं। इसके अलावा, 5 लाख से अधिक नवजात शिशुओं की मौत के मामलों से भी इन विकारों का संबंध बताया गया है।
क्या है प्री-एक्लेम्पसिया?
प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें आम तौर पर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद हाई ब्लड प्रेशर विकसित होता है और इसके साथ शरीर के अंगों को प्रभावित करने वाले संकेत भी दिखाई दे सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज नहीं होने पर यह मां और बच्चे, दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसकी गंभीर स्थिति से एक्लेम्पसिया हो सकता है, जिसमें दौरे पड़ने का खतरा रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, ब्लड प्रेशर की निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी है।
समय पर जांच और इलाज की कमी बड़ी चुनौती
WHO के अनुसार, कई देशों में गर्भवती महिलाओं को आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इनमें शामिल हैं:
- नियमित ब्लड प्रेशर जांच की सुविधा।
- पेशाब में प्रोटीन की जांच।
- एस्पिरिन जैसी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, जहां चिकित्सकीय रूप से इसकी जरूरत हो।
- हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाएं।
- गंभीर मामलों में मैग्नीशियम सल्फेट जैसी जरूरी दवाएं।
- प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं की उपलब्धता।
कमजोर रेफरल व्यवस्था और अस्पतालों तक पहुंचने में देरी भी गर्भवतियों की जान के लिए खतरा बढ़ाती है। गरीबी, मानवीय संकट और दूरदराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं को विशेष रूप से अधिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
WHO ने 140 से अधिक साझेदारों के साथ तैयार की रणनीति
WHO की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित विभाग की निदेशक डॉ. पास्केल अलोटे के अनुसार, प्री-एक्लेम्पसिया किसी भी गर्भावस्था में विकसित हो सकता है। इसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि महिला के ब्लड प्रेशर की समय पर जांच हुई या नहीं और स्थिति गंभीर होने पर उसे गुणवत्तापूर्ण आपातकालीन चिकित्सा मिल पाई या नहीं। WHO ने मई 2026 में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में 140 से अधिक साझेदारों को एक साथ लाकर इस समस्या से संबंधित 20 प्राथमिक शोध प्रश्नों की पहचान की। इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी तकनीकों, दवाओं और उपचार विकल्पों के विकास को बढ़ावा देना है, जिनसे गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की भविष्यवाणी, पहचान और उपचार बेहतर हो सके।

नई दवाओं और शोध पर निवेश की जरूरत
WHO के नए रोडमैप में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्री-एक्लेम्पसिया और एक्लेम्पसिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए विशेष रूप से विकसित और नियामक संस्थाओं से स्वीकृत दवाओं के क्षेत्र में अभी भी बड़ी कमी है। अब तक शोध का बड़ा हिस्सा जांच और निदान से जुड़ी तकनीकों पर केंद्रित रहा है, जबकि रोकथाम और उपचार के नए विकल्पों पर अपेक्षाकृत कम निवेश हुआ है। इस कमी को दूर करने के लिए WHO ने सरकारों, शोध संस्थानों, दवा कंपनियों, वित्तपोषकों और स्वास्थ्य संगठनों से मिलकर काम करने की अपील की है।
प्रसव के बाद भी मां की सेहत पर पड़ सकता है असर
गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का प्रभाव बच्चे के जन्म के बाद भी बना रह सकता है। ऐसी महिलाओं में भविष्य में क्रॉनिक हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, गर्भावस्था के दौरान प्रभावित बच्चों में समय से पहले जन्म लेने तथा आगे चलकर हृदय और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों से WHO की अपील
WHO ने सरकारों, शोधकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों, दवा उद्योग, सामाजिक संगठनों और विकास साझेदारों से इस दिशा में निवेश और प्रयासों को एकजुट करने की अपील की है। इस वैश्विक रोडमैप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर की पहचान, रोकथाम और उपचार के प्रभावी उपाय उन महिलाओं और बच्चों तक पहुंचें, जिन्हें उनकी सबसे अधिक जरूरत है।

