हमारे नीचेवाले दांत जब ऊपर के दांत से मिलते हैं, तो उसे ऑक्लुजन (Occlusion) कहा जाता है। जब किसी वजह से हमारे ऊपर और नीचे के दांत सटाते समय दर्द हो या ऐसा लगे कि किसी दांत में सूजन है या वह हिल रहा हो, तो उसे ट्रॉमा फ्रॉम ऑक्लुजन (Trauma from Occlusion) या टीएफओ (TFO) कहते हैं। यह तब होता है, जब पूर्व में पीछे के किसी दांत की फीलिंग करायी गयी हो, जिसकी फिनिशिंग सही से नहीं हुई हो और वह बाकी दांतों से थोड़ा ऊपर उठा हुआ हो।
ऐसी स्थिति में डेंटिस्ट या दंत रोग विशेषज्ञ दांत की उस ऊपरी सतह को घिसकर समतल कर देते हैं। दूसरी स्थिति वह होती है, जिसमें आगे के नीचे वाले दांत ऊपर के दांतों से टकराएं, क्योंकि आमतौर पर ऊपर और नीचे के दांतों के बीच एक गैप (2 से 4 एमएम) होता है। इस तरह के मामलों में डेंटिस्ट आगे के नीचे व ऊपर के दांतों को हल्का घिस देते हैं, ताकि टकराव या ट्रॉमा की स्थिति न बनें। इससे सूजन व दांतों का हिलना कुछ दिनों में ठीक हो जाता है।
ऑक्लूजन ट्रॉमा (Occlusion Trauma) क्या है?
ऑक्लूजन से होने वाला आघात या दर्द दांतों का वह चोट है, जो अत्यधिक बल से दांतों के टकराने जैसे चबाने, भोजन को दांतों से काटने के कारण बना दबाव (chewing or biting pressure) के कारण पेरियोडोंटल (Periodontal) संरचनाओं में ऊतक परिवर्तन उत्पन्न करती है। यह दांतों की बीमारी (पेरियोडोंटल डिजीज) का कारण तो नहीं है, लेकिन अगर मसूड़ों में पहले से सूजन मौजूद हो, तो यह ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुंचा सकता है।

ट्रॉमा फ्रॉम ऑक्लूजन क्यों होता है?
1. गलत फिनिशिंग वाली डेंटल फिलिंग
कई बार पिछला कोई दांत जब भरवाया जाता है (डेंटल फिलिंग), और वह फिलिंग बाक़ी दांतों से थोड़ी ऊंची रह जाती है, तो चबाने के दौरान वह पहले टकरा जाता है। इससे उस दांत पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और दर्द या सूजन हो सकती है।
उपचार:
डेंटिस्ट इस स्थिति में उस ऊंची सतह को हल्के से घिसकर बाकी दांतों के स्तर के बराबर कर देते हैं, जिससे आराम मिल जाता है।
2. दांतों का आपस में टकराना (Malocclusion)
कुछ मामलों में सामने के नीचे के दांत ऊपर के सामने वाले दांतों से असामान्य रूप से टकराने लगते हैं। जबकि सामान्यतः इनके बीच हल्का (2-4 एमएम) गैप होता है। यह लगातार टकराव आगे चलकर ट्रॉमा और दांतों की गतिशीलता का कारण बन सकता है।
उपचार:
डेंटिस्ट आगे के ऊपर और नीचे के दांतों की सतह को बहुत ही हल्के से समतल कर देते हैं, जिससे दांतों के बीच टकराव खत्म हो जाए और पेरियोडोंटल स्ट्रेस कम हो जाए।
ऑक्लूजन से होने वाली परेशानी के प्रकार:
1. प्राइमरी ऑक्लूजन आघात (Primary Occlusion Trauma)
जब सामान्य और स्वस्थ पेरियोडोंटल सपोर्ट वाले दांतों पर अत्यधिक बल डाला जाता है। उदाहरण के लिए
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ओवरफिलिंग : दांतों में यदि पूर्व में सड़न यह अन्य वजहों से फीलिंग कराई गई हो और वह जरूरत से ज्यादा फिलिंग (दांतों के इलाज के दौरान उसके घिसने के बाद लगाये जाने वाले केमिकल की प्रक्रिया) हो जाए।
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दांतों का गलत संरेखण: फिलिंग के दौरान या फिर दांतों का सही स्थिति में न होना।
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ब्रुक्सिज्म (दांत पीसने की आदत): बहुत से बच्चों और कुछ बड़ों में भी अपने दांतों को आपस में घिसने की आदत होती है, जिससे मसूड़ों और दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचता है।
2. सेकेंड्री ऑक्लूजन आघात (Secondary Occlusion Trauma)
जब कमजोर या पहले से क्षतिग्रस्त पेरियोडोंटल सपोर्ट वाले दांतों पर सामान्य या अधिक बल डाला जाए। इसमें दांतों में पहले से की गई ट्रीटमेंट या उसको दिया गया सपोर्ट विभिन्न कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाता है। या फिर दांत पीसने की आदत के कारण वह घिस जाता है। उदाहरण के लिए
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मसूड़ों की बीमारी से ढीले हुए दांत
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हड्डी में सपोर्ट की कमी
प्रमुख कारण और जोखिम कारक
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ब्रुक्सिज्म (Bruxism): दांत पीसने या भींचने की आदत
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गलत रिस्टोरेशन: ओवरकंटूर्ड क्राउन या फिलिंग
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ऑर्थोडोंटिक गलतियां: दांतों की गलत दिशा में मूवमेंट
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दांतों की स्थिति: झुके या विस्थापित दांत
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दांतों की कमी: यदि कोई दांत टूट जाए तो उसके आस-पास के दांतों के दबाव के कारण वे हल्का खाली जगह की ओर जा सकते हैं। या फिर ऊपर या नीचे के दांत लम्बे हो सकते हैं
लक्षण और संकेत (Signs & Symptoms)
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दांतों की असामान्य गतिशीलता
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फ्रेमिटस (दांतों में कंपन)
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घिसे हुए दांत
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दबाव पर संवेदनशीलता
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काटने या चबाने में दर्द
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दांतों का स्थान बदलना
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पीरियोडोंटल लिगामेंट स्पेस का चौड़ा होना (X-ray में दिखता है)
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हड्डी का नुकसान (विशेष रूप से कोणीय हड्डी का)
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मसूड़ों की सूजन और जेब की गहराई बढ़ना
ऑक्लूजनल आघात की जांच
1. क्लीनिकल परीक्षण:
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दांतों की गति, फ्रेमिटस, घिसाव की जांच
2. रेडियोग्राफ:
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हड्डी और लिगामेंट की स्थिति देखना
3. ऑक्लूजन विश्लेषण:
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आर्टिकुलेटिंग पेपर, टी-स्कैन या डायग्नोस्टिक कास्ट से
4. रोगी का इतिहास:
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ब्रुक्सिज्म या हाल की डेंटल प्रक्रियाएं
टीएफओ का उपचार
🔹 प्राइमरी स्थिति में
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ऑक्लूजन समायोजन: सेलेक्टिव ग्राइंडिंग से बाधा हटाना। यानी की दांतों के लिए आने वाले विशेष ग्राइंडर मशीन से उसे इतना घिस देना कि उसकी अतिरिक्त फिलिंग घिस कर अन्य दांतों के बराबर हो जाए।
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गलत रिस्टोरेशन का सुधार: ऊची फिलिंग या क्राउन हटाना, जिसके बाद दांतों की स्थिति सामान्य हो जाए।
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ऑर्थोडोंटिक ट्रीटमेंट: दांतों का पुनः संरेखण यानी कि उसके एलाइनमेंट को ठीक करना।
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माउथगार्ड: ब्रुक्सिज्म से सुरक्षा के लिए माउथगार्ड लगाना। यानी जिन्हें दांत पीसने की आदत है, उनके दांतों में माउथगार्ड लगाना।
🔹 सेकेंड्री ऑक्लूजन आघात के लिए:
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स्प्लिंटिंग: ढीले दांतों को फिलिंग या अन्य तरीकों से स्थिर करना
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पीरियोडोंटल ट्रीटमेंट: स्केलिंग, रूट प्लानिंग या सर्जरी
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दांत निकालना: गंभीर मामलों में दांत की सर्जरी कर उसे बाहर निकाल देना, जिससे कि मसूड़ों को बार-बार सूजन होने से बचाया जा सके।
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प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन: दांतों का प्रतिस्थापन, इसके तहत पुराने दांतों की ट्रीटमेंट करने के बाद उसमें नए दांत लगाए जाते हैं। यह दांतों की स्थिति पर निर्भर करता है कि पुराने दांत को पूरी तरह निकालकर नए दांत लगाए जाएंगे या फिर रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) किया जाएगा।

- डॉ आरती कुमारी, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री, हजारीबाग कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज एंड हॉस्पिटल और
डॉ आशीष भगत, भगत डेंटल क्लीनिक, रांची से बातचीत पर आधारित।


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