कुष्ठ रोग (Leprosy) को कई लोग अब भी गलतफहमी के कारण छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार से जोड़ते हैं। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह गलत है। यह एक संक्रामक बीमारी तो है, लेकिन हाथ मिलाने, साथ खाने-पीने या रहने से नहीं फैलती। उचित इलाज और सावधानी बरतने से यह पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
कुष्ठ रोग नियंत्रण में कॉन्टैक्ट स्क्रीनिंग और रोकथाम की भूमिका
केवल केस की पहचान और मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) से इलाज करना संक्रमण के प्रसार को पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त नहीं पाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कुष्ठ रोग नियंत्रण के लिए मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच करना जरूरी है। इसमें परिवार, आसपास रहने वाले लोग और सामाजिक संपर्क शामिल होते हैं। WHO यह भी सलाह देता है कि संपर्क में आए लोगों को रोकथाम के रूप में रिफैम्पिसिन की एक खुराक (SDR-PEP) दी जाए, जिससे संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद मिल सके।
क्या है कुष्ठ रोग?
कुष्ठ रोग को हैनसेन रोग (Hansen’s Disease) भी कहा जाता है। यह माइकोबैक्टीरियम लेप्रे (Mycobacterium leprae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह रोग मुख्य रूप से हवा के माध्यम से फैलता है, जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है। बैक्टीरिया को शरीर में पनपने में 4-5 साल लगते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया 20 साल तक भी हो सकती है।
कुष्ठ रोग के लक्षण
- त्वचा पर हल्के रंग के पैच बनना
- प्रभावित क्षेत्र का सुन्न होना
- त्वचा मोटी और रूखी होना
- हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना
- हाथ-पैरों में घाव या छाले जो महसूस न हों
- आंखों में जलन और लालिमा
- उंगलियों और अंगों का विकृत होना
समय पर इलाज से कुष्ठ रोग 6-12 महीने में हो सकता है ठीक
कुष्ठ रोग के इलाज के लिए मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) अपनाई जाती है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रमाणित है। यह दवा सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त उपलब्ध है। समय पर निदान और उपचार से मरीज 6-12 महीने में पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
बिहार और झारखंड में कुष्ठ रोग की स्थिति
2015 के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में प्रति 10,000 आबादी पर 0.91 कुष्ठ रोगी थे, जबकि झारखंड में यह संख्या 0.96 थी। 2018 में यह औसत बढ़कर क्रमशः 1.18 और 1.05 हो गया, जिससे पता चलता है कि अभी भी इस बीमारी को लेकर जागरूकता की जरूरत है।
भारत सरकार की पहल: कुष्ठ उन्मूलन अभियान
भारत सरकार ने नेशनल लेप्रोसी इराडिकेशन प्रोग्राम (NLEP) के तहत लेप्रोसी डिटेक्शन कैंपेन और फोकस लेप्रोसी कैंपेन शुरू किए हैं। इन अभियानों का उद्देश्य घर-घर जाकर कुष्ठ रोग के मामलों की पहचान करना और समय पर उनका उपचार कराना है।
कुष्ठ रोग से बचाव के उपाय
- शरीर की नियमित जांच करें, विशेषकर त्वचा पर किसी भी असामान्य परिवर्तन को नजरअंदाज न करें।
- हाथ-पैरों की सफाई का ध्यान रखें और नमी बनाए रखें।
- घाव या छालों को साफ रखें और तुरंत इलाज कराएं।
- गर्म चीजें पकड़ने के लिए चिमटा या तौलिया का उपयोग करें।
- आंखों की देखभाल करें और रात में आंखों को ढककर सोएं।
- परिवार के किसी सदस्य को कुष्ठ रोग हो तो उसका नियमित इलाज करवाएं और खुद भी जांच कराएं।
कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता और यह पूरी तरह से इलाज योग्य है। सही समय पर पहचान और उचित इलाज से कोई भी व्यक्ति 6-12 महीने में ठीक हो सकता है। अगर आप या आपके आसपास किसी को इस बीमारी के लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं और उपचार शुरू करें। समाज को इस बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना होगा, ताकि कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य जीवन जी सके।


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