Shaithlyasana : शैथलासन क्या है?
शैथलासन, को आमतौर पर आगे की ओर झुकने वाली योग मुद्रा के रूप में जाना जाता है। यह देखने में जितना सरल लगता है, उतना शुरुआती अवस्था में होता नहीं है। इसलिए शुरुआत में इसका अभ्यास करते समय विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए। आसन का अभ्यास कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। पीठ और पेट यानी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या, पैरों में अकड़न, मांसपेशियों में खिचावए लंबे समय तक बैठ नहीं पाना आदि परेशानियों से यह निजात दिला सकता है। यह आसन पाचन अंगों की मालिश करने, उनकी ताकत और कार्य क्षमता को बढ़ाने में बेहद मददगार है।
शैथलासन का अभ्यास कैसे करें:
इस आसन का अभ्यास करने के लिए समतल सतह या जमीन पर एक कंबल बिछा लें और अपने दोनों पैरों को अपने सामने फैलाकर बैठ जाएं। अपने पंजों और घुटनों को अलग रखें।
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पैरों की स्थिति:
अपने दाहिने पैर को मोड़ें और तलवे को अपनी बाईं जांघ के निचले हिस्से पर रखें, यह सुनिश्चित करते हुए कि दाहिना पैर ज़मीन को छूता रहे।
अपने बाएं पैर को अपने शरीर के पीछे मोड़ें, तलवे और एड़ी को अपने बाएं नितंब के करीब लाएं।
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हाथों की स्थिति:
अपने दाहिने टखने को दोनों हाथों से पकड़ें। सांस छोड़ें और अपने शरीर को आराम दें।
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सांस लेना और आगे की ओर झुकना:
दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए सांस लें, उन्हें एक-दूसरे के करीब रखें।
अपने दाहिने घुटने पर आगे की ओर झुकें, अपने माथे को जमीन से छूने का लक्ष्य रखें। इस स्थिति में आराम करें और कोमल, सामान्य सांस लें।
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शुरुआती स्थिति में वापस आना:
अपने हाथों, सिर और धड़ को वापस ऊपर उठाते हुए सांस लें, अपनी भुजाओं को सीधा करें। अपने हाथों को नीचे करते हुए सांस छोड़ें।
अपने पैरों की स्थिति बदलकर प्रक्रिया को दोहराएं।

सांस लेने की तकनीक:
- अपनी भुजाओं को ऊपर उठाते हुए सांस लें।
- आगे की ओर झुकते समय सांस छोड़ें।
- अंतिम स्थिति में रहते हुए सामान्य सांस लें और प्रारंभिक स्थिति में वापस आते समय सांस लें।
अभ्यास के दौरान सजगता जरूरी
आसन से परिचित होने के बाद, अपनी आंखें बंद करें और अपने शरीर और सांस लेने पर ध्यान दें। अपनी पीठ की मांसपेशियों के आराम पर ध्यान दें और अंतिम स्थिति में गहरी, धीमी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। अपने आध्यात्मिक संबंध को बढ़ाने के लिए मणिपुर चक्र पर ध्यान करें।
कितनी देर करें:
जितनी देर तक हो सके, अंतिम स्थिति को आराम से बनाए रखने का लक्ष्य रखें। अभ्यास के साथ, अपने शरीर के प्रत्येक तरफ एक मिनट तक ध्यान रखें।
आसन के बाद अभ्यास के बाद क्या करें
शैथलासन ध्यान मुद्राओं के लिए एक आधारभूत अभ्यास के रूप में कार्य करता है। इस आसन के बाद, गर्दन और श्रोणि क्षेत्रों (pelvic areas) में संतुलित खिंचाव बनाने के लिए पूर्व भुजंगासन (Purva Bhujangasana), सरल धनुरासन (saral dhanurasna ) या धनुरासन (dhanurasna) जैसे पीछे की ओर झुकने वाले आसन करने पर विचार करें।
सावधानियां और सीमाएं
- पीठ के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव करने वाले व्यक्तियों को केवल उतना ही आगे झुकना चाहिए जितना आरामदायक हो।
- पिछले तीन महीनों के भीतर सर्जरी करवाने वाले किसी भी व्यक्ति को इस आसन को करने से पहले किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से सलाह लेनी चाहिए।
- घुटने के दर्द वाले लोगों को भी इस आसन से बचना चाहिए।
शैथलासन के मुख्य लाभ :
इस आसन के नियमित अभ्यास से पैर की मांसपेशियां लचीली हो जाती हैं, जिससे अकड़न को कम करने में मदद मिलती है। ध्यान लगाने वाले व्यक्ति के लिए यह आसन बेहद लाभकर है। मांसपेशियों के लचीलेपन की वजह से वे लंबे समय तक बैठकर ध्यान लगा पाते हैं।
- रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है: यह आसन रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ावा देता है और इसे प्राकृतिक स्थिति में वापस लाने में मदद करता है।
- पाचन (digestion) को मजबूत बनाता है : यह आसन पेट के अंगों की मालिश करता है, पाचन क्रिया में सुधार करता है और बेहतर रक्त परिसंचरण (blood cerculation) से हृदय रोग, धमनी की समस्यासएं जैसे वेरिकोज वेंस (Varicose Veins), पीठ के दर्द आदि से छुटकारा दिलाता है।
- जोड़ों का लचीलापन: यह कूल्हे के जोड़ों के भीतर गतिशीलता में सुधार करने में सहायता करता है। इससे जोड़ों का अकड़न धीरे-धीरे ठीक हो जाता है और लचीलापन आने से इसमें दर्द की शिकायत भी दूर हो जाती है।
- तंत्रिका तंत्र का संतुलन: शैथलासन तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने में मददगार है।
शैथलासन (Shaithlyasana) को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आपकी शारीरिक और आध्यात्मिक सेहत में काफी सुधार हो सकता है। आज ही इस सौम्य लेकिन प्रभावी आगे की ओर झुकने वाले आसन की परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव करें।
योग विशेषज्ञ राधारमण जी से बातचीत पर आधारित

