By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
SehatnamaSehatnamaSehatnama
  • Home
  • Sehat updates
  • Yoga & Fitness
  • Women’s Health
  • Food & Diet
  • Mental Health & Meditation
  • Health & Diseases
Notification Show More
Aa
SehatnamaSehatnama
Aa
  • Food & Diet
  • Sehat updates
  • Home
  • Beauty & Grooming
  • Women’s Health
  • Food & Diet
  • Sehat updates
  • Mental Health & Meditation
  • Yoga & Fitness
  • Health & Diseases
Follow US
Sehatnama > Blog > Mental Health & Meditation > प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं में क्यों हो रहा डिप्रेशन ?
Mental Health & MeditationWomen's Health

प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं में क्यों हो रहा डिप्रेशन ?

Saurabh Chaubey
Last updated: 2026/02/15 at 3:55 AM
By Saurabh Chaubey
Share
7 Min Read
SHARE
Highlights
  • चिड़चिड़ाहट में बस बच्चे की देखभाल करते जाना समझदारी नहीं है, बल्कि खुद के बारे में सोचना जरूरी है। अगर आप खुश रहेंगी, तभी बच्चे का भी ध्यान रख पाएंगी। अपने खान-पान को अनदेखा न करें।
  • हार्मोंस के स्तर में बदलाव, तनाव महसूस करना, नींद पूरी न होना, किसी अंजान चीज या घटना के होने का डर, अत्यधिक भावुक होना, चिड़चिड़ापन और मनोदशा में बदलाव आदि। कुछ मां को यह समस्या बच्चा होने के कई महीने बाद तक जारी रहती है। इस स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है।

मां-बाप बनना हर इंसान के लिए बेहद खास है। हालांकि, गर्भावस्था (pregnancy) और बच्चे के जन्म के बाद एक महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। कई बार यह बदलाव महिलाओं के लिए डिप्रेशन (depression) का वजह बन जाता है। इसके कारण वह छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ी हो जाती है। बिना बात रोने लगती हैं या फिर दुखी हो जाती हैं। कई बार आत्मविश्वास खो देती है। उसे लगता है कि अब बच्चा पालना ही उसका काम है और यह उसके अकेले की जिम्मेवारी है। अब वह जिंदगी में आगे कुछ कर नहीं पाएगी। ऐसे ही खयालात जब गंभीर होने लगते हैं, तो इसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है।

Contents
थकान और खालीपन महसूस करना लक्षण :प्रसव के बाद हॉर्मोनल गड़बड़ी प्रमुख कारण :खुद का ख्याल रखना जरूरी है :पूरी नींद लेना सबसे जरूरी:काउंसेलिंग के साथ उपचार भी जरूरी:

शारीरिक के साथ भावनात्मक बदलाव संभव:
प्रसव के बाद मां में कई शारीरिक और भावनात्मक बदलाव आते हैं, जैसे- शरीर में हार्मोंस के स्तर में बदलाव, तनाव महसूस करना, नींद पूरी न होना, किसी अंजान चीज या घटना के होने का डर, अत्यधिक भावुक होना, चिड़चिड़ापन और मनोदशा में बदलाव आदि। कुछ मां को यह समस्या बच्चा होने के कई महीने बाद तक जारी रहती है। इस स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है। इसका इलाज न किया जाये, तो कई महीनों तक मां परेशान रहती है।

 

 

पिता में 10 फीसदी मामले तो मां में 14 फीसदी मामले:
ऐसा ही कुछ एहसास पिता में भी हो सकता है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन नये पिताओं को भी हानि पहुंचाता है। पुरुषों में मौजूद पोस्टपार्टम डिप्रेशन बच्चे के विकास के कुछ पहलुओं पर नाकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। एक शोध में 10 में से एक नये पिता में गंभीर रूप से पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum depression) होता है। अवसाद की सामान्य जनसंख्या में पुरुषों में 3 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। शोध से यह भी पता चला है कि नयी माताओं में 14 फीसदी को पोस्टपार्टम डिप्रेशन होता है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब माता-पिता दोनों इस तरह के तनाव से गुजर रहे हों। ऐसे माता-पिता अपने बच्चों से बातचीत करने, उसे पढ़ाने, कहानी सुनाने या उसके साथ खेलने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इससे ये परेशानी और बढ़ जाती है। माता-पिता के साथ बातचीत कम होने या नहीं होने से बच्चों की शब्दों की दुनिया बहुत छोटी हो जाएगी। एकल परिवार में इस तरह की समस्या और ज्यादा है। ऐसे परिवार को तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

थकान और खालीपन महसूस करना लक्षण :

थकान महसूस करना, खालीपन, दुखी होना या आंसू आना, आत्मविश्वास खोना, अपराध बोध, शर्म महसूस करना, खुद को नाकाम मानना, उलझन में होना या घबराहट, अपने बच्चे के लिए खतरा महसूस होना, अपने अकेलेपन या बाहर निकलने का डर, सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी न होना, बहुत सोना या बिल्कुल न सोना, बहुत खाना या बिल्कुल न खाना, ऊर्जा की कमी महसूस करना, अपनी देखभाल सही से न करना, स्वास्थ्य में साफ सफाई का ध्यान न रखना, स्पष्ट सोच न पाना और निर्णय लेने में मुश्किल होना, सभी जिम्मेदारियों से दूर भागना आदि प्रमुख लक्षण हैं।

 

प्रसव के बाद हॉर्मोनल गड़बड़ी प्रमुख कारण :

प्रसव के बाद हॉर्मोनल गड़बड़ी होने पर, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरॉन व कोर्टिसोल हाॅर्मोन में गिरावट होना, गर्भावस्था से पहले किसी तरह की मानसिक बीमारी से पीड़ित होना, परिवार में किसी को डिप्रेशन की शिकायत होना या कोई मानसिक बीमारी होने के कारण, पति-पत्नी का एक-दूसरे से दूरी महसूस करना, कई तरह के भावनात्मक परिवर्तन भी होते हैं।पुरानी पहचान खत्म होने का डर, कैरियर खत्म होने का डर या तनाव, मातृत्व की जिम्मेदारी, दिनचर्या में परिवर्तन के कारण तनाव महसूस करना आदि, बुरे दिखने वाले शारीरिक बदलाव जैसे स्ट्रेचमार्क्स और वजन का बढ़ना, पिछले एक साल के दौरान आपने तनावग्रस्त मौहाल का अनुभव किया हो जैसे- गर्भावस्था में जटिलताएं, बीमारी या नौकरी न होना, अपने पति या पत्नी के साथ संबंधों में समस्या होना, सर्पोटिंग सिस्टम का कमजोर होना, वित्तीय समस्या का होना, अनियोजित या अवांछित गर्भावस्था आदि। प्रसव के बाद इसका खतरा उन महिलाओं में अधिक होता है, जिन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर हो।

खुद का ख्याल रखना जरूरी है :

चिड़चिड़ाहट में बस बच्चे की देखभाल करते जाना समझदारी नहीं है, बल्कि खुद के बारे में सोचना जरूरी है। अगर आप खुश रहेंगी, तभी बच्चे का भी ध्यान रख पाएंगी। अपने खान-पान को अनदेखा न करें। गर्भावस्था के समय आये स्ट्रेचमार्क्स अक्सर डिप्रेशन का कारण बनते हैं। स्ट्रेचमार्क्स को हटाने के तरीकों पर काम करने की कोशिश करें। जरूरत हो, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लें।

पूरी नींद लेना सबसे जरूरी:

एक साथ आये ढेर सारे तनाव से निबटने का एक तरीका है भर पूरी नींद लेना। इसके लिए जब बच्चा सोये तो आप भी अपनी नींद पूरी कर लें, क्योंकि छोटे बच्चे अक्सर पूरी-पूरी रात सोते ही नहीं हैं। ऐसे में सोने का एक भी मौका न छोड़ें। आपके आत्मविश्वास और सहयोग का सबसे बड़ा साधन आपका पार्टनर है। यह जरूरी है कि आप उनके साथ अपने विश्वास को बनाकर रखें, ताकि वो आप से दोस्त की तरह व्यवहार करें और बच्चे के जन्म के बाद आपकी जिंदगी में आये बदलावों को बेहतर तरीके से समझ सकें। मन में जो भी उधेड़बुन हो, उसे अपने साथी या अन्य रिश्तेदार से शेयर कीजिए। अगर जरूरत महसूस हो, तो शुरुआत के कुछ माह तक बच्चे के पालन-पोषण के लिए किसी से मदद लीजिए।

काउंसेलिंग के साथ उपचार भी जरूरी:

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का उपचार प्रायः परामर्श और दवा से होता है। मनोवैज्ञानिक से आप अपनी परेशानियों के बारे में चर्चा कर सकते हैं। इसमें शर्माने या डरने की कोई बात नहीं है। काउंसेलिंग व पार्टनर के साथ बेहतर सामंजस्य से आपको काफी लाभ मिलेगा। इसके अलावा कुछ दवाएं भी दी जा सकती हैं, जिससे आपको लाभ हो, पर कोई भी दवा खुदसे न खाएं, इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

– डॉ दिव्या सुमन, स्त्री रोग विशेषज्ञ से बातचीत पर आधारित

TAGGED: depression, Postpartum depression, अवसाद, डिप्रेशन, नई मां की देखभाल, नींद लेना कितना जरूरी, पोस्टपार्टम डिप्रेशन, मां बनने के बाद अवसाद, मां बनने के बाद डिप्रेशन
Saurabh Chaubey February 15, 2026 October 9, 2023
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Fast Four Quiz: Precision Medicine in Cancer

How much do you know about precision medicine in cancer? Test your knowledge with this quick quiz.
Get Started
मलेरिया का होमियोपैथी से इलाज: एक प्राकृतिक विकल्प

जैसे ही मौसम बदलता है, मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती…

Ranchi: पहली बार बिना चीरे के रीढ़ की हड्डी की सफल सर्जरी

Sadar Hospital Ranchi: रांची के सदर अस्पताल में चिकित्सा क्षेत्र में एक…

टाइप 2 डायबिटीज: मिथक और तथ्य, जानें इस बारे में सबकुछ

टाइप 2 डायबिटीज (diabetes type 2) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर…

Your one-stop resource for medical news and education.

Your one-stop resource for medical news and education.
Sign Up for Free

You Might Also Like

Health & DiseasesMental Health & Meditation

शोध: पुराने दर्द से बढ़ रहा अवसाद, Mental Health पर गहरा असर

By Sehatnama desk
Sehat updatesWomen's Health

स्वस्थ मातृत्व : बिहार में एनीमिया से लड़ने को शुरू हुआ FCM थेरेपी अभियान

By Sehatnama desk
Health & DiseasesWomen's Health

एनीमिया से लड़ने को आज से शुरू होगी FCM थेरेपी

By Sehatnama desk
Health & DiseasesWomen's Health

गर्भावस्था में लापरवाही पड़ सकती है भारी, समय पर ये जांच हैं जरूरी

By Saurabh Chaubey
Facebook Twitter Pinterest Youtube Instagram
Company
  • Privacy Policy
  • Editorial Policy
  • Accessibility Statement
  • Contact US
  • Feedback
  • Advertisement
More Info
  • Newsletter
  • Food & Diet
  • Sehat updates

Sign Up For Free

Subscribe to our newsletter and don't miss out on our programs, webinars and trainings.

Join Community
Made by ThemeRuby using the Foxiz theme. Powered by WordPress
Join Us!

Subscribe to our newsletter and never miss our latest news, podcasts etc.

Zero spam, Unsubscribe at any time.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?