राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के तहत निकुष्ठ 2.0 कुष्ठ रोग प्रबंधन के लिए एक एकीकृत पोर्टल है। यह केंद्र, राज्य और जिला स्तरों पर संकेतकों और एक रियल टाइम डैशबोर्ड के रूप में आंकड़ों की डेटा रिकॉर्डिंग और विश्लेषण में सहायता करेगा।
निकुष्ठ 2.0 पोर्टल के लॉन्च के साथ-साथ कुष्ठ रोग के लिए राष्ट्रीय सामरिक योजना व रोडमैप (2023-27) और कुष्ठ रोग में सूक्ष्मजीव-रोधी प्रतिरोध (एएमआर) निगरानी के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश भी जारी किए गए। यह रणनीति और रोडमैप कुष्ठ रोग के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाने, इसके प्रसार को रोकने, रोगियों का पता लगाने के प्रयासों में तेजी लाने और एक मजबूत निगरानी बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में सहायता करेगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत के छत्तीसगढ़, झारखंड, ओड़िशा, महाराष्ट्र और बिहार कुछ ऐसे राज्य हैं जहां अभी भी प्रति 10 हजार की जनसंख्या पर एक या उससे अध्सिक कुष्ठ रोगी हैं। दादर एवं नगर हवेली और चंडीगढ़ दो ऐसे केंद्र शासित प्रदेश हैं, जो इसी केटेगरी में आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के गाइडलाइन के अनुसार प्रति 10 हजार की जनसंख्या पर यदि एक या उससे कम औसत रोगी होते हैं तो वैसे जगह को कुष्ठ रोग मुक्त मान लिया जाता है।
राष्ट्रीय औसत की बात करें तो भारत ने 2005 में ही प्रति 10,000 जनसंख्या पर एक से कम मामले के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानदंड के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में कुष्ठ रोग का उन्मूलन हासिल कर लिया था। हालांकि, कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका बढ़ा हुआ औसत सरकार के लिए चिंता का विषय है। कुष्ठ रोग को पूर्ण रूप से खत्म करने के लिए हर साल जनवरी माह के अंतिम रविवार को विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस (World Leprosy Eradication Day) मनाया जाता है। ताकि लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जाए और इस कलंक को जड़ से उखाड़ फेंका जाए।
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के तहत पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए कदम के परिणामस्वरूप, 2014-15 में 1,25,785 नए कुष्ठ मामलों से घटकर 2021-22 में यह संख्या 75,394 हो गई है, जो वैश्विक नए कुष्ठ मामलों का 53.6% है। कुष्ठ रोग के मरीजों का सही और सटीक मूल्यांकन करने के लिए एक व्यवस्थित डेटा संग्रहण और रिपोर्टिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
1. डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग स्तर
- मूल्यांकन प्रपत्र का उपयोग: कुशल और विस्तृत मूल्यांकन के लिए रोगी की जानकारी एकत्र करने के लिए कुशल मूल्यांकन प्रपत्र का उपयोग किया जाता है।
- रिपोर्टिंग स्तर: डेटा का संग्रहण और रिपोर्टिंग विभिन्न स्तरों पर किया जाता है, जैसे:
- पीएचसी स्तर: डेटा पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर एकत्र किया जाता है और इसे ब्लॉक स्तर पर भेजा जाता है।
- ब्लॉक स्तर: डेटा को समेकित किया जाता है और जिला स्तर पर भेजा जाता है।
- जिला और राज्य स्तर: जिले और राज्य स्तर पर डेटा का विश्लेषण किया जाता है और उसे राष्ट्रीय स्तर पर भेजा जाता है।
2. डेटा विश्लेषण और रिपोर्टिंग
- ब्लॉक स्तर: सभी पीएचसी से डेटा संकलित किया जाता है और एक्सेल शीट में जिला स्तर पर भेजा जाता है।
- जिला स्तर: जिले का समेकित डेटा राज्य स्तर पर भेजा जाता है, और फिर राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्ट किया जाता है।
- राष्ट्रीय स्तर: राष्ट्रीय एनएलईपी टीम को वार्षिक और मासिक प्रगति रिपोर्ट प्राप्त होती है, जो समेकित संकेतकों के आधार पर होती है।
3. डीएचआईएस-2 डेटा प्रवाह
- डेटा प्रविष्टि: डीईओ (डेटा एंट्री ऑपरेटर) द्वारा ब्लॉक स्तर पर पाक्षिक या मासिक डेटा दर्ज किया जाता है।
- एनएलईपी टीम की भूमिका: एनएलईपी टीम ने ब्लॉक स्तर पर डेटा एंट्री ऑपरेटरों को निर्देशित किया है। इस प्रणाली में, रोगी का डेटा केवल एक बार दर्ज किया जाता है जब मरीज का कार्ड भरा जाता है।
- डेटा रिकॉर्डिंग: एनएलईपी टीम ने एक मैन्युअल तंत्र विकसित किया है, जिसमें रोगी पंजीकरण और उपचार पूरा होने पर डेटा दर्ज किया जाता है।
4. समस्याएं और समाधान
- अनुवर्ती जानकारी: रोगी की अनुवर्ती जानकारी फिलहाल कार्ड पर कैप्चर की जाती है और इसे एप्लिकेशन में दर्ज करने का कोई स्थापित तरीका नहीं है।
- उपचार समाप्ति की जानकारी: एनएलईपी टीम को अभी तक एक तंत्र विकसित करना है जिससे उपचार समाप्ति की जानकारी सीधे एप्लिकेशन में दर्ज की जा सके।
5. एलसीडीसी अभियान
- डेटा रिपोर्टिंग: एलसीडीसी (कुष्ठ रोग के मामलों का पता लगाने का अभियान) के तहत, डेटा ग्रामीण स्तर पर एकत्रित किया जाता है, जिसमें प्रत्येक खोज दल में एक पुरुष और एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल होते हैं।
- डेटा प्रवाह: पीएचसी → ब्लॉक → जिला → राज्य → राष्ट्रीय स्तर पर डेटा रिपोर्ट किया जाता है।
6. निष्कर्ष और आगे की दिशा
- ट्रेनिंग और आईईसी: डेटा राष्ट्रीय स्तर पर रिपोर्ट किया जा रहा है, लेकिन इसे एप्लिकेशन में कैप्चर नहीं किया गया है। एनएलईपी टीम इस प्रक्रिया में सुधार के लिए उपायों पर विचार कर रही है।


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good initiative by Mr. Modi government.
informative story
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