दरभंगा: कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), जाले, दरभंगा में ग्रामीण युवक एवं युवतियों के लिए “कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना एवं प्रबंधन” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार को हुई। इस ट्रेनिंग में युवा कृषको कृषि से जुड़े यंत्रों के बारे में बताया जाएगा। जैसे- कौन-सी मशीन खर-पतवार नियंत्रण के लिए है। कौन सी गेंहू, धान, मक्का आदि की बुआई और कटाई के लिए। साथ ही विभिन्न तरह की व्याधियों से निपटने में यंत्रों का क्या कार्य है और मशीनों का संचालन तथा उसकी देखभाल किस प्रकार की जा सकती है। इतना ही नहीं इन मशीनों को भाड़ा पर देकर या अपने साथी किसानों के कृषि कार्यों में मदद कर किस प्रकार स्वरोजगार किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र जाले के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने की।
श्रमिकों की कमी के बीच बढ़ रही कस्टम हायरिंग सेंटर की जरूरत
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में बढ़ती श्रम लागत और श्रमिकों की कमी को देखते हुए कस्टम हायरिंग सेंटर की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से किसान कम लागत पर आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर समय पर कृषि कार्य पूरा कर सकते हैं। इससे कृषि कार्यों में समय और लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के साथ उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी बनती हैं।
कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने से लेकर प्रबंधन तक मिलेगा प्रशिक्षण
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना और संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। इसमें आवश्यक कृषि यंत्रों का चयन, वित्तीय प्रबंधन, किराया निर्धारण, अभिलेख संधारण, मशीनों का संचालन एवं रख-रखाव और व्यवसाय योजना तैयार करने जैसे विषय शामिल हैं।प्रतिभागियों को केंद्र के सफल संचालन से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न कृषि यंत्रों का प्रदर्शन और उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आयोजित किया जा रहा है।

इन कृषि यंत्रों की दी जाएगी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान खेत की जुताई, रोपाई, बुआई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले विभिन्न कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इनमें डिस्क प्लाउ, कल्टीवेटर, रोटावेटर, मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, सबसोइलर, चीज़ल प्लाऊ, पैडी ट्रांसप्लांटर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्टीक्रॉप प्लांटर, ड्रम सीडर, राइस व्हीट सीडर, ब्रश कटर, सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर कम बाइंडर, हारवेस्टर, कम्बाइन हार्वेस्टर, स्ट्रॉ बेलर, स्प्रेयर और खरपतवार निकौनी यंत्र आदि शामिल हैं।
ग्रामीण युवाओं के लिए उद्यम का अवसर
केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों से प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने क्षेत्रों में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर ग्रामीण युवाओं के लिए एक लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित हो सकता है। इसके माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है। ग्रामीण युवा कृषि यंत्रों को किराये पर उपलब्ध कराने के माध्यम से अपना उद्यम शुरू कर सकते हैं।
7 अगस्त को होगा प्रशिक्षण का समापन
प्रशिक्षण कार्यक्रम में दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए ग्रामीण युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 7 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।

